Strategy : मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के बीच ईरान ने अपनी नई स्ट्रेटेजी के तहत एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने दुनिया भर के कूटनीतिक जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य से दर्जनों जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इनमें सबसे बड़ी संख्या चीन से जुड़े व्यापारिक जहाजों की है।
वैश्विक तेल व्यापार की जीवन रेखा है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य कोई आम समुद्री रास्ता नहीं है। यह ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी को जोड़ता है। दुनिया भर में सप्लाई होने वाले कच्चे तेल का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। पश्चिमी देशों के साथ ईरान के खराब रिश्तों के कारण हमेशा यह डर बना रहता है कि ईरान इस रास्ते को ब्लॉक कर सकता है। लेकिन इस बार ईरान ने संयम और कूटनीति का परिचय देते हुए कॉमर्शियल जहाजों को बिना किसी रोक-टोक के जाने दिया है।
चीन और ईरान की बढ़ती नजदीकियां
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान का यह कदम चीन के साथ उसकी गहरी होती रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी दर्शाता है। चीन इस समय ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। ऐसे में चीनी जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना यह साबित करता है कि ईरान अपने आर्थिक सहयोगियों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब लाल सागर और आस-पास के समुद्री इलाकों में मर्चेंट जहाजों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं।
पश्चिमी देशों के लिए एक कूटनीतिक संदेश
मीडिया रिपोर्ट इस बात की ओर भी इशारा करती है कि ईरान इसके जरिए अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों को एक स्पष्ट संदेश देना चाहता है। वह यह दिखाना चाहता है कि खाड़ी की सुरक्षा और समुद्री रास्तों का नियंत्रण उसके हाथ में है, और वह अपने दोस्तों व दुश्मनों के बीच फर्क करना अच्छी तरह जानता है। इस घटनाक्रम से वैश्विक तेल बाजार ने भी राहत की सांस ली है। अगर होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। फिलहाल ईरान के इस फैसले से सप्लाई चेन सुचारू बनी हुई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता एक बड़ा खतरा टल गया है।


