मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन अंचल का सीओ बनकर साइबर अपराधी ने पटना में तैनात एक न्यायिक अधिकारी से ठगी करने की कोशिश की। जालसाज ने उनसे जमीन के दाखिल-खारिज के लंबित मामले को जल्द निपटाने का झांसा दिया। न्यायिक अधिकारी से जमीन से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण दस्तावेज वाट्सएप से मंगवाए। जब कॉल करके लगातार पैसों की मांग की जाने लगी, तो समझ गए कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। न्यायिक अधिकारी ने तुरंत मड़वन अंचल के सीओ के आधिकारिक सरकारी नंबर पर संपर्क किया तो पता चला कि जिस मोबाइल नंबर से बात और वाट्सएप चैट की जा रही थी, वह उनका या उनके कार्यालय का नहीं है। तब न्यायिक अधिकारी ने कोतवाली थाने में केस दर्ज करा दिया। पुलिस को वह मोबाइल नंबर भी सौंप दिया है, जिससे जालसाज ने कॉल और चैट की थी। पुलिस उसकी सीडीआर निकालने आैर लोकेशन लेने में जुटी है। सीए ऑफिस की मिलीभगत से डाटा लीक दाखिल-खारिज का आवेदन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को अॉनलइन दिया गया। फर्जी सीओ बनकर फोन करने वाले साइबर अपराधी को इस बात की सटीक जानकारी थी कि दाखिल-खारिज के लिए किसने आवेदन किया है, आवेदन की स्थिति क्या है और आवेदक का मोबाइल नंबर क्या है। अंचल कार्यालय की मिलीभगत से डाटा लीक हुआ। इतनी गोपनीय जानकारी किसी बाहरी व्यक्ति के पास पहुंचना संभव नहीं है। कोई न कोई सीआे अॉफिस में जरूर है जो डाटा बेच रहा है। मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन अंचल का सीओ बनकर साइबर अपराधी ने पटना में तैनात एक न्यायिक अधिकारी से ठगी करने की कोशिश की। जालसाज ने उनसे जमीन के दाखिल-खारिज के लंबित मामले को जल्द निपटाने का झांसा दिया। न्यायिक अधिकारी से जमीन से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण दस्तावेज वाट्सएप से मंगवाए। जब कॉल करके लगातार पैसों की मांग की जाने लगी, तो समझ गए कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। न्यायिक अधिकारी ने तुरंत मड़वन अंचल के सीओ के आधिकारिक सरकारी नंबर पर संपर्क किया तो पता चला कि जिस मोबाइल नंबर से बात और वाट्सएप चैट की जा रही थी, वह उनका या उनके कार्यालय का नहीं है। तब न्यायिक अधिकारी ने कोतवाली थाने में केस दर्ज करा दिया। पुलिस को वह मोबाइल नंबर भी सौंप दिया है, जिससे जालसाज ने कॉल और चैट की थी। पुलिस उसकी सीडीआर निकालने आैर लोकेशन लेने में जुटी है। सीए ऑफिस की मिलीभगत से डाटा लीक दाखिल-खारिज का आवेदन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को अॉनलइन दिया गया। फर्जी सीओ बनकर फोन करने वाले साइबर अपराधी को इस बात की सटीक जानकारी थी कि दाखिल-खारिज के लिए किसने आवेदन किया है, आवेदन की स्थिति क्या है और आवेदक का मोबाइल नंबर क्या है। अंचल कार्यालय की मिलीभगत से डाटा लीक हुआ। इतनी गोपनीय जानकारी किसी बाहरी व्यक्ति के पास पहुंचना संभव नहीं है। कोई न कोई सीआे अॉफिस में जरूर है जो डाटा बेच रहा है।


