अगर इलाज के बाद भी आपके बार-बार बुखार आ रहा है। शरीर में कमजोरी आ रही है। शरीर में खून की कमी है। हाथ-पांव में कमजोरी महसूस हो रही है, तो इन लक्षणें को इग्नोर न करें। अगर इलाज के बाद भी यह लक्षण ठीक न हों तो ये ब्लड में कैंसर सेल की शुरुआत का अलर्ट हो सकता है। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल (बीएमसीएच) के ब्लड कैंसर और बीएमटी विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश सिंह शेखावत ने यह कहा। वर्ल्ड ब्लड कैंसर डे 28 मई को है। इस पर डॉ. शेखावत ने बताया- कार-टी सेल थेरेपी और बोनमैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से ब्लड कैंसर और ब्लड से जुड़ी दूसरी गंभीर बीमारियों के इलाज हो रहे हैं। इसके रिजल्ट अच्छे आ रहे हैं। नई तकनीकों में ऐसे होता है इलाज डॉ. प्रकाश सिंह शेखावत ने बताया- कार-टी सेल थेरेपी में मरीज की प्रतिरक्षा कोशिकाओं (टी-सेल) को विशेष तकनीक से कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है। वहीं बीएमटी के जरिए रोगग्रस्त बोनमैरो को स्वस्थ स्टेम सेल्स से रिप्लेस किया जाता है। यह इलाज ल्यूकीमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर रोगों में उपयोगी है। बच्चों में कई तरह के ब्लड कैंसर पीडियाट्रिक ब्लड कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. शिवानी माथुर ने बताया- बच्च्चों में कई तरह के ब्लड कैंसर होते हैं। शुरुआती स्तर में इसका इलाज करके इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने बताया- बीएमसीएच में ब्लड कैंसर से जुड़ी दो परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत रोगियों का फ्री इलाज किया जाता है। ये बच्चों के लिए जीवनदान परियोजना है। उन्होंने बताया- परियोजना में लो-रिस्क वाले तीन तरह के ब्लड कैंसर एक्यूट लिम्फोब्लॉस्टिक ल्यूकीमियां (एएलएल), एक्यूट प्रोमाइलोसाइटिक ल्यूकीमिया (एएमपीएल), होजकिन्स लिम्फोमा (एचएल) शामिल हैं। डॉ. शिवानी माथुर ने बताया- अगस्त 2014 से मार्च 2026 तक इस योजना में 11.03 करोड़ रुपए की लागत से 176 बच्चों को फ्री इलाज देकर कैंसर मुक्त किया गया। ये सभी बच्चे कैंसर से सही होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। व्यस्कों में होने वाले ब्लड कैंसर के लिए क्रोनिक माइलोइड ल्यूकीमिया कैंसर मुक्ति योजना (सीएमएल-सीएमवाए) है।


