Tikamgarh News: अपने खर्च से आदिवासी बच्चों को पढ़ा रहे सत्यप्रकाश, स्कूल पहुंचाने खरीदा ई-रिक्शा

Tikamgarh News: अपने खर्च से आदिवासी बच्चों को पढ़ा रहे सत्यप्रकाश, स्कूल पहुंचाने खरीदा ई-रिक्शा

Tikamgarh Tribal Children Education: मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने वाले परिवारों के बच्चों की शिक्षा बाधित न हो इसके लिए एक युवक ने बीड़ा उठाया है। आर्थिक रूप से सबसे कमजोर वर्ग में आने वाले आदिवासी बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए यह युवक अपनी ओर से लगातार दो सालों से प्रयास कर रहा है। ऐसे बच्चों की शिक्षा के लिए वह न सिर्फ उन्हें पढ़ाई के लिए जरूरी कॉपी, किताबें और अन्य सामान उपलब्ध करा रहे है, बल्कि स्कूलों तक पहुंचाने के लिए एक ई-रिक्शा भी ले लिया है।

दो साल से बच्चों को अपने खर्च पर पढ़ा रहे सत्यप्रकाश

ग्राम बरकछाय के खिरक पटरियन में रहने वाले आदिवासी परिवारों के माता-पिता रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं। उनके बच्चे गांव में अपने बुजुर्ग दादा-दादी के साथ रह रहे हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए समाजसेवी सत्यप्रकाश पटेल पिछले दो वर्षों से लगातार उनकी हर संभव मदद कर रहे हैं। सत्यप्रकाश पटेल ने अपने निजी खर्च पर लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित बच्चों के घर से शासकीय प्राथमिक शाला निवोरा तक आने-जाने के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था की है। इतना ही नहीं, वे बच्चों की कॉपी-किताबें, स्कूल ड्रेस, स्टेशनरी तथा खान-पान का खर्च भी स्वयं वहन कर रहे हैं।

बच्चों को बेहतर भविष्य देने का प्रयास

वर्तमान में सत्यप्रकाश आदिवासी बस्ती के अनिल आदिवासी, आकाश आदिवासी, शिव आदिवासी, पिंकी आदिवासी, रिंकी आदिवासी, भूपेंद्र आदिवासी, साहिल आदिवासी और पप्पू आदिवासी सहित कई बच्चों की शिक्षा में सहयोग कर रहे हैं। इन बच्चों के माता-पिता परिवार का भरण-पोषण करने पलायन कर बाहर चले गए हैं। सत्यप्रकाश पटेल का कहना है कि क्षेत्र में रोजगार के सीमित साधन होने से पलायन करना इनकी मजबूरी है, ऐसे में सबसे अधिक नुकसान बच्चों की शिक्षा का होता है। उनका प्रयास है कि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे के भविष्य में बाधा न बने। इसलिए वे इन बच्चों को अपने परिवार के सदस्य की तरह शिक्षा, आवश्यक संसाधन और बेहतर भविष्य देने का प्रयास कर रहे हैं। सत्यप्रकाश बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च अपनी खेती की आय से निकालते हैं। सत्यप्रकाश पटेल की यह पहल की गांव के लोग सराहना करते हैं।

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