बिहार में सीवरेज ट्रीटमेंट और जल संरक्षण की दिशा में ‘बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन’ (बुडको) का काम तेज हो गया है। नमामि गंगे परियोजना के तहत पटना समेत राज्यभर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाए जा रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स का विश्व बैंक की टीम ने 13 से 17 अप्रैल के बीच निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह तय किया गया कि एसटीपी से साफ किए गए पानी (ट्रीटेड वाटर) का उपयोग कई स्तरों पर होगा। नदियों में छोड़ने के अलावा इसे उद्योगों को दिया जाएगा। इसके इस्तेमाल के लिए एक विशेष नीति (Policy) बनाई जाएगी। बुडको के एमडी अनिमेष कुमार पराशर ने बताया कि विभाग का मुख्य प्रयास ट्रीटेड पानी का अधिकतम उपयोग करना है। भूजल पर दबाव होगा कम बुडको की इस पहल से भूजल (Groundwater) पर दबाव कम होगा। इससे शहरों में हरियाली बढ़ेगी और उद्योगों को पानी की आसान उपलब्धता होगी। विश्व बैंक की टीम ने पानी के पुन: उपयोग (Reuse) की इस योजना को सराहा है। नगर निकायों में पार्कों और पौधों को बेहतर रखने के लिए भी इसी पानी की सप्लाई होगी। चार जिलों के एसटीपी की हुई जांच विश्व बैंक की टीम ने भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और पटना के कई एसटीपी का जायजा लिया। टीम ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जांच की: सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की निगरानी अब सेंट्रलाइज्ड एससीएडीए (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम से होगी। इस आधुनिक प्रणाली के लाभ: रियल-टाइम मॉनिटरिंग: पानी की गुणवत्ता, फ्लो रेट (प्रवाह दर) और पंपों की स्थिति को एक साथ देखा जा सकेगा। त्वरित अलर्ट: किसी भी तकनीकी गड़बड़ी होने पर सिस्टम तुरंत अलर्ट भेजेगा, जिससे समस्याओं का फौरन समाधान हो सकेगा। पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और उच्च तकनीकी मानकों से लैस रहेगी। ट्रीटेड पानी के तीन मुख्य उपयोग बिहार में सीवरेज ट्रीटमेंट और जल संरक्षण की दिशा में ‘बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन’ (बुडको) का काम तेज हो गया है। नमामि गंगे परियोजना के तहत पटना समेत राज्यभर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाए जा रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स का विश्व बैंक की टीम ने 13 से 17 अप्रैल के बीच निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह तय किया गया कि एसटीपी से साफ किए गए पानी (ट्रीटेड वाटर) का उपयोग कई स्तरों पर होगा। नदियों में छोड़ने के अलावा इसे उद्योगों को दिया जाएगा। इसके इस्तेमाल के लिए एक विशेष नीति (Policy) बनाई जाएगी। बुडको के एमडी अनिमेष कुमार पराशर ने बताया कि विभाग का मुख्य प्रयास ट्रीटेड पानी का अधिकतम उपयोग करना है। भूजल पर दबाव होगा कम बुडको की इस पहल से भूजल (Groundwater) पर दबाव कम होगा। इससे शहरों में हरियाली बढ़ेगी और उद्योगों को पानी की आसान उपलब्धता होगी। विश्व बैंक की टीम ने पानी के पुन: उपयोग (Reuse) की इस योजना को सराहा है। नगर निकायों में पार्कों और पौधों को बेहतर रखने के लिए भी इसी पानी की सप्लाई होगी। चार जिलों के एसटीपी की हुई जांच विश्व बैंक की टीम ने भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और पटना के कई एसटीपी का जायजा लिया। टीम ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जांच की: सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की निगरानी अब सेंट्रलाइज्ड एससीएडीए (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम से होगी। इस आधुनिक प्रणाली के लाभ: रियल-टाइम मॉनिटरिंग: पानी की गुणवत्ता, फ्लो रेट (प्रवाह दर) और पंपों की स्थिति को एक साथ देखा जा सकेगा। त्वरित अलर्ट: किसी भी तकनीकी गड़बड़ी होने पर सिस्टम तुरंत अलर्ट भेजेगा, जिससे समस्याओं का फौरन समाधान हो सकेगा। पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और उच्च तकनीकी मानकों से लैस रहेगी। ट्रीटेड पानी के तीन मुख्य उपयोग


