पूर्णिया में रेफरल अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई:गंदगी-अव्यवस्था से मरीज बेहाल, पेशेंट बोले- मुफ्त इलाज के नाम पर होती है वसूली

पूर्णिया में रेफरल अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई:गंदगी-अव्यवस्था से मरीज बेहाल, पेशेंट बोले- मुफ्त इलाज के नाम पर होती है वसूली

पूर्णिया के अमौर रेफरल अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराई दिख रही हैं। अस्पताल में गंदगी, अवैध वसूली, डॉक्टरों की लापरवाही और मूलभूत सुविधाओं की कमी से लोग परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि मरीज गंदे बेड पर इलाज कराने को मजबूर हैं, जबकि प्रसूति महिलाओं और बच्चों को घंटों फर्श पर बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है और हर कदम पर पैसे की मांग की जा रही है। यहां इलाज कराने पहुंचे मरीज और उनके परिजन स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। कैंपस में गंदगी का अंबार मरीज मोहम्मद इरफान ने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान उन्हें अधिकांश दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ीं। गरीब मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां हर कदम पर पैसे मांगे जाते हैं। अस्पताल परिसर में गंदगी का अंबार लगा है। पीने के पानी की व्यवस्था भी पूरी तरह ध्वस्त है। परिसर का कोई भी चापाकल सही तरीके से काम नहीं कर रहा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकारी मीनू के मुताबिक भोजन नहीं दिया जा रहा। नाश्ते के नाम पर केवल दूध और बिस्कुट देकर खानापूर्ति की जाती है, जबकि तय मीनू में अंडा, केला और पाव रोटी जैसी चीजें शामिल हैं। 500 से 600 रुपए तक वसूले जा रहे मरीज परिजन रुखसाना खातून ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के नाम पर खुलेआम रुपए की मांग की जाती है। अस्पताल में डिलीवरी के दौरान अवैध वसूली के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। आशा कार्यकर्ताओं और मरीजों के परिजनों का कहना है कि बिना पैसे यहां कोई काम नहीं होता। किसी से 500 रुपए तो किसी से 600 रुपए तक वसूले गए। एक आशा कार्यकर्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एम्बुलेंस में प्रसव होने के बाद भी अस्पताल पहुंचते ही पैसे मांगे गए और 300 रुपए देने के बाद ही काम किया गया। आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मी खुलेआम कहते हैं कि पैसा ऊपर तक देना पड़ता है। ग्रामीणों ने डॉक्टरों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि डॉक्टर तय समय पर अस्पताल में मौजूद नहीं रहते। कई बार इमरजेंसी के दौरान भी डॉक्टर ड्यूटी से गायब मिलते हैं। मरीजों का कहना है कि प्राथमिक इलाज करने के बजाय उन्हें तुरंत पूर्णिया या दूसरे बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है, जिससे रास्ते में मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। सख्त कार्रवाई की मांग लगातार शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं होने से ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। लोगों ने जिला प्रशासन और सिविल सर्जन से मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों पर सख्त कार्रवाई और अस्पताल की व्यवस्था तत्काल सुधारने की मांग की है। मामले की जांच की जा रही है वहीं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एहतमामुल हक ने कहा कि अस्पताल से जुड़ी शिकायतों की जांच की जा रही है। जो भी कर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पूर्णिया के अमौर रेफरल अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराई दिख रही हैं। अस्पताल में गंदगी, अवैध वसूली, डॉक्टरों की लापरवाही और मूलभूत सुविधाओं की कमी से लोग परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि मरीज गंदे बेड पर इलाज कराने को मजबूर हैं, जबकि प्रसूति महिलाओं और बच्चों को घंटों फर्श पर बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है और हर कदम पर पैसे की मांग की जा रही है। यहां इलाज कराने पहुंचे मरीज और उनके परिजन स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। कैंपस में गंदगी का अंबार मरीज मोहम्मद इरफान ने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान उन्हें अधिकांश दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ीं। गरीब मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां हर कदम पर पैसे मांगे जाते हैं। अस्पताल परिसर में गंदगी का अंबार लगा है। पीने के पानी की व्यवस्था भी पूरी तरह ध्वस्त है। परिसर का कोई भी चापाकल सही तरीके से काम नहीं कर रहा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकारी मीनू के मुताबिक भोजन नहीं दिया जा रहा। नाश्ते के नाम पर केवल दूध और बिस्कुट देकर खानापूर्ति की जाती है, जबकि तय मीनू में अंडा, केला और पाव रोटी जैसी चीजें शामिल हैं। 500 से 600 रुपए तक वसूले जा रहे मरीज परिजन रुखसाना खातून ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के नाम पर खुलेआम रुपए की मांग की जाती है। अस्पताल में डिलीवरी के दौरान अवैध वसूली के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। आशा कार्यकर्ताओं और मरीजों के परिजनों का कहना है कि बिना पैसे यहां कोई काम नहीं होता। किसी से 500 रुपए तो किसी से 600 रुपए तक वसूले गए। एक आशा कार्यकर्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एम्बुलेंस में प्रसव होने के बाद भी अस्पताल पहुंचते ही पैसे मांगे गए और 300 रुपए देने के बाद ही काम किया गया। आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मी खुलेआम कहते हैं कि पैसा ऊपर तक देना पड़ता है। ग्रामीणों ने डॉक्टरों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि डॉक्टर तय समय पर अस्पताल में मौजूद नहीं रहते। कई बार इमरजेंसी के दौरान भी डॉक्टर ड्यूटी से गायब मिलते हैं। मरीजों का कहना है कि प्राथमिक इलाज करने के बजाय उन्हें तुरंत पूर्णिया या दूसरे बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है, जिससे रास्ते में मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। सख्त कार्रवाई की मांग लगातार शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं होने से ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। लोगों ने जिला प्रशासन और सिविल सर्जन से मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों पर सख्त कार्रवाई और अस्पताल की व्यवस्था तत्काल सुधारने की मांग की है। मामले की जांच की जा रही है वहीं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एहतमामुल हक ने कहा कि अस्पताल से जुड़ी शिकायतों की जांच की जा रही है। जो भी कर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।  

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