Adani Group Stocks: गौतम अदाणी के लिए अमेरिका से राहत भरी खबर आते ही अदाणी ग्रुप के शेयरों में आज तेजी देखी जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अदाणी के खिलाफ चल रहे कथित रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के केस को खारिज करने का फैसला किया है। इसके साथ ही अदाणी ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश की योजना भी बनाई है। इस बड़ी राहत का असर शेयर बाजार में देखने को मिला है। निवेशकों ने अदाणी ग्रुप के शेयरों में काफी खरीदारी की है, जिससे शेयरों में आज उछाल आया है।
शेयर बाजार में निवेशकों को हुआ फायदा
अमेरिका से केस खत्म होने की खबर आने के बाद आज अदाणी ग्रुप के शेयर भागने लगे। अदाणी ग्रीन एनर्जी का शेयर बढ़कर 1,442 रुपए पर पहुंच गया। वहीं, अडानी टोटल गैस का शेयर 3.3 फीसदी की बढ़त के साथ 635.80 रुपए पर पहुंच गया। इसके अलावा ग्रुप की अन्य कंपनियों में भी तेजी देखने को मिल रही है।

अमेरिका में क्या चला था अडानी ग्रुप पर केस?
अमेरिका के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) और न्याय विभाग ने गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और कुछ अन्य लोगों पर एक गंभीर आरोप लगाया था। आरोप यह था कि इन्होंने 2020 से 2024 के बीच भारत में सौर ऊर्जा (Solar Energy) के बड़े टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई थी।
अमेरिकी अधिकारियों का तर्क था कि अदाणी ग्रीन एनर्जी के कुछ बांड्स (Bonds) अमेरिकी निवेशकों ने भी खरीदे थे, इसलिए उनके पैसों का इस्तेमाल गलत तरीके से हुआ और इससे अमेरिकी बाजार प्रभावित हुआ। लेकिन, अदाणी के वकीलों ने अमेरिकी कोर्ट में दलील दी। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला भारत की कंपनियों, भारत के व्यापार और ऐसे शेयर्स से जुड़ा है जो अमेरिका में लिस्टेड ही नहीं हैं।
ट्रंप सरकार ने क्यों खत्म किया केस?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस केस के खत्म होने के पीछे एक बहुत बड़ा व्यावसायिक कारण है। बताया जा रहा है कि अदाणी ग्रुप ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर (10 Billion Dollars) के भारी-भरकम निवेश की योजना बनाई है। दिलचस्प बात यह है कि गौतम अदाणी का केस लड़ रहे वकील, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील भी रह चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब तक अमेरिका में ये कानूनी मामले पेंडिंग थे, तब तक यह 10 अरब डॉलर का निवेश आगे नहीं बढ़ सकता था।
अदाणी ग्रुप के लिए इसके क्या मायने हैं?
यह फैसला अदाणी ग्रुप के लिए बेहद अहम है। पिछले कई महीनों से अमेरिका में चल रही इस जांच की वजह से निवेशकों में डर का माहौल था। इसके कारण ग्रुप को विदेशी फंड जुटाने और अपने कारोबार को विदेशों में फैलाने में कई तरह की अड़चनों का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन अब अमेरिका से पूरी तरह क्लीन चिट मिलने के बाद निवेशकों का भरोसा दोबारा मजबूत हुआ है।


