हरदोई में मंगलवार की शाम एक अज्ञात शव की शिनाख्त अंतिम संस्कार से ठीक पहले शहर के मुक्तिधाम में हुई। 1 मई से लापता युवक की तलाश कर रहे परिजनों ने शव को पहचान लिया। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया। इस घटना पर युवक के मामा शफी उस्मानी ने मुस्लिम युवक के शव को मुक्तिधाम भेजने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि धर्म के मुताबिक शव की पहचान कर उसे मुक्तिधाम या कब्रिस्तान भेजना चाहिए। बेनीगंज पुलिस ने 1 मई को एक सड़क हादसे में मारे गए युवक का शव बरामद किया था। शिनाख्त न होने के कारण शव को 72 घंटे तक पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया था। मंगलवार को निर्धारित अवधि पूरी होने पर शव का पोस्टमार्टम कराया गया और उसे अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम भेजा गया। इसी दौरान शाम के समय सीतापुर जिले के नैमिषारण्य थाना क्षेत्र के औरंगाबाद निवासी नावेद पुत्र मोहम्मद हनीफ मुक्तिधाम पहुंचे। उन्होंने शव की पहचान अपने 35 वर्षीय बड़े भाई जावेद के रूप में की। पुलिस ने गहन छानबीन के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव नावेद को सौंप दिया। नावेद ने बताया कि जावेद कोतवाली देहात के पंडित पुरवा में एक बेकरी में काम करते थे और वहीं रहते थे। 1 मई को वह कुछ सामान लेने औरंगाबाद गए थे। उसी शाम बस से वापस लौटते समय वह मौसी के घर बेनीगंज जाने के लिए प्रतापनगर चौराहे पर उतरे थे, जिसके बाद से वह लापता हो गए थे। 3 मई को नैमिषारण्य थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। नावेद मंगलवार को अपने भाई की तलाश करते हुए बेनीगंज कोतवाली पहुंचे। पुलिस ने उन्हें कुछ तस्वीरें दिखाईं और पोस्टमार्टम हाउस जाने को कहा। शाम को जब वह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि पोस्टमार्टम के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम ले जाया गया है। यह जानकारी मिलते ही नावेद मुक्तिधाम पहुंचे और शव की पहचान अपने भाई के रूप में की। नावेद के अनुसार, जावेद के परिवार में उनकी पत्नी शमसुन के अलावा चार बेटे और एक बेटी हैं।


