तमिलनाडु में इस बार 234 सीटों पर विधानसभा चुनाव का मुकाबला काफी रोचक है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को हुई वोटिंग में 4000 से अधिक प्रत्याशियों की किस्मत 4.85 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने तय कर दी है। पूरे चुनावी माहौल का विश्लेषण करें तो इसके विभिन्न पड़ाव रहे। इसकी शुरुआत अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी TVK की स्थापना और उसकी चुनावी रैलियों से हुई है। सितंबर 2025 में विजय की करूर रैली में भगदड़ और 41 लोगों की मौतों ने एक काला अध्याय जोड़ा था।
वोटों और सीटों की गणित समझने में उलझे विश्लेषक
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस बार थलापति विजय की एंट्री से कड़ा मुकाबला हो गया है। हालांकि, TVK प्रमुख थलापति विजय की सितंबर 2025 में हुई करूर रैली से उनकी क्षवि से एक काला अध्याय जुड़ गया। करूर रैली में भगदड़ के बाद से विभिन्न घटनाक्रमों के बाद शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा चुनाव हुए। गठबंधनों के समीकरण, वोटों और सीटों की गणित समझने और साझा करने के बाद भी विश्लेषक विजय के ‘ट्रेंड’ को अभी भी पूरी तरह से ना तो समझ पा रहे हैं और ना ही सुलझा पा रहे हैं। मतदान की पूर्व संध्या से लेकर मतगणना की उलटी गिनती शुरू होने तक केवल विजय की चर्चा ही सुनाई पड़ रही है कि ऊंट किस करवट बैठेगा?
चर्चा के केंद्र में विजय, लेकिन असमंजस बरकरार
राजनेताओं, आमजन, प्रशासक व खुफिया एजेंसियों की अपनी-अपनी राय हैं। मगर इन सभी के केंद्र में ‘विजय’ ही हैं। इन सभी का अनुमान है कि विजय अच्छा-खासा वोट शेयर लेंगे। चुनाव से पहले सभी उनको ‘स्पॉइलर’ मान रहे थे। उनकी वजह से द्रविड़ दलों को कितना नुकसान पहुंचा? क्या वे सत्तारूढ़ डीएमके को इतनी क्षति पहुंचा पाएंगे कि उसे बहुमत नहीं मिले? क्या उनकी वजह से सरकार विरोधी वोट जो AIADMK गठबंधन को जाने चाहिए थे, उनमें भी सेंधमारी हुई?
क्या दलितों, मुस्लिम व ईसाई वोटर्स ने परिवर्तन के रूप में विजय को बतौर विकल्प चुना है? क्या महिलाओं को सीएम एमके स्टालिन की योजनाओं की तुलना में ‘स्टारडम’ वाले विजय पर ज्यादा विश्वास है? ऐसे अनगिनत सवालों का जवाब 4 मई को मिल जाएगा। राजनेताओं की सुगबुगाहट वाले समाचार सुर्खियों में हैं।
प्रमुख दलों के प्रत्याशी अपने निर्वाचन क्षेत्र में पूरी तरह डटे हुए हैं ताकि कोई गड़बड़ होने की आशंका नहीं हो। वहीं, सीएम स्टालिन का परिवार पर्यटन पर है तो विजय तीर्थाटन पर है। प्रमुख प्रतिपक्षी दल एआइएडीएमके व भाजपा की ओर से पूरी तरह शांति दिखाई दे रही है। लेकिन यह तय मान सकते हैं कि विस चुनाव परिणाम राज्य के सियासी इतिहास में बड़ा बदलाव लाएगा।
क्या कहते हैं एग्जिट पोल?
तमिलनाडु में 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। प्रमुख एग्जिट पोल्स में द्रमुक गठबंधन की वापसी का संकेत दे रहे हैं। प्रजा पोल, चाणक्य स्ट्रैटजी, पीपल्स पल्स, पी-मारक्यू, मैट्रिज और पीपल्स इन्साइट के अनुमानों में द्रमुक गठबंधन बहुमत के पार जाता दिख रहा है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य की जनता एक बार फिर सत्ताधारी गठबंधन पर भरोसा जता सकती है। दूसरी ओर, जेवीसी के सर्वे ने सभी को चौंकाते हुए NDA गठबंधन को 128 से 147 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान लगाया है। इन विरोधाभासी नतीजों ने चुनाव परिणामों को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है।


