Syria YPJ: ISIS से लड़कर खदेड़ने वाली कुर्द महिला सैनिकों को नई सीरियाई सेना में नहीं मिली जगह, सरकार ने क्या कहा?

Syria YPJ: ISIS से लड़कर खदेड़ने वाली कुर्द महिला सैनिकों को नई सीरियाई सेना में नहीं मिली जगह, सरकार ने क्या कहा?

Kurdish women fighters: सीरिया में नई सरकार आने के बाद सबसे बड़ा झटका उन कुर्द महिला सैनिकों को लगा है जिन्होंने कभी इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ सबसे आगे रहकर लड़ाई लड़ी थी।

वाईपीजे यानी वुमेन प्रोटेक्शन यूनिट्स की कमांडर नौरोज अहमद ने साफ कहा कि राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात में उन्हें बताया गया कि सेना में महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं है।

‘हम सेना में शामिल होना चाहते थे’

नौरोज अहमद ने रॉयटर्स से कहा- हम सेना में शामिल होना चाहते थे। हमारे पास अनुभव है। हमने एक अलग ब्रिगेड या बटालियन बनाने की बात कही थी ताकि हमारी फोर्स संगठित रहे और कहीं भी छोटे-छोटे ग्रुप में न भेजी जाए। लेकिन इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया।

ये महिला फाइटर्स सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्सेज यानी एसडीएफ के साथ मिलकर काम करती थीं। उन्होंने उत्तरी और पूर्वी सीरिया के बड़े इलाकों से आईएस को खदेड़ने में अहम भूमिका निभाई थी।

दुनिया भर में इन महिलाओं की हो रही थी चर्चा

पूरी दुनिया में उनकी तस्वीरें छाई हुई थीं क्योंकि वे महिलाएं थीं और आतंकियों से सीधा मुकाबला कर रही थीं। अब एसडीएफ को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया है।

उसके कमांडर मजलूम अब्दी को राष्ट्रपति का सलाहकार बना दिया गया है और कई लड़ाके रक्षा मंत्रालय में शामिल हो गए हैं। लेकिन रक्षा मंत्रालय में एक भी महिला नहीं है। इसलिए वाईपीजे अब गृह मंत्रालय से बात कर रही है।

फोर्स में 1500 से ज्यादा लड़ाकू

नौरोज अहमद ने कहा कि उन्होंने स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स में जगह मांगी है क्योंकि वह उनके काम से मेल खाती है। उन्होंने बताया कि उनकी फोर्स में 1500 से ज्यादा लड़ाकू हैं और वे चाहती हैं कि सबको एक साथ रखा जाए। जवाब अगले कुछ दिनों में आने की उम्मीद है।

इस बीच, गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने रुदाव को बयान दिया है कि वाईपीजे की महिलाओं को मंत्रालय में जगह दी जाएगी। लेकिन उन्हें पूरे सीरिया में कहीं भी तैनात किया जा सकता है, किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रखा जाएगा।

इस बीच, 20 साल की वाईपीजे फाइटर गोक्सु सियागर ने सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- वे हमेशा महिलाओं को कमजोर समझते हैं। हम अपनी ताकत किसी पुरुष या मौजूदा राज्य से नहीं लेतीं। हम अपनी खास जगह चाहते हैं और इस पर अड़े हुए हैं।

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