Supreme Court के नोटिस पर बोले Sambit Patra, देश में स्वतंत्र रूप से काम कर रहीं संस्थाएं

Supreme Court के नोटिस पर बोले Sambit Patra, देश में स्वतंत्र रूप से काम कर रहीं संस्थाएं

नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कहा कि निर्वाचन आयोग से संबंधित याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय द्वारा आयोग और केंद्र को नोटिस जारी किया जाना इस बात का ‘सबूत’ है कि देश में सभी संस्थाएं ‘स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं’ और ‘डर तथा तानाशाही’ का माहौल नहीं है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘देश बहुत लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ रहा है। हर कोई अपने मन की बात कह रहा है।

सभी प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं का पालन किया जा रहा है। इससे बेहतर लोकतंत्र का मॉडल और क्या हो सकता है? मुझे लगता है कि भारत लोकतंत्र का उत्सव मना रहा है।’’
उच्चतम न्यायालय ने एक याचिका पर निर्वाचन आयोग और केंद्र से एक सप्ताह में जवाब मांगा है।

याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले निर्वाचन आयोग द्वारा कथित तौर पर दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना फैसला लेने के तरीके को चुनौती दी गई है। पात्रा ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘जनहित याचिका के जरिये उच्चतम न्यायालय का रुख करना, अदालत का सुनवाई करना और दूसरे पक्ष को भी सुने जाने का अवसर सुनिश्चित करने के लिए नोटिस जारी करना एक मानक प्रक्रिया है। यह लोकतांत्रिक और न्यायिक प्रक्रिया दोनों है।

स्वाभाविक रूप से, यह प्रक्रिया उसी तरह आगे बढ़ रही है, जैसे इसे बढ़ना चाहिए।’’
भाजपा सांसद ने कहा कि यह इस बात का सबूत है कि देश में सभी संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं को भारतीय संविधान के दायरे में काम करने की स्वतंत्रता है। पात्रा ने यह भी कहा, ‘‘हालांकि, आज मैं उन लोगों से एक सवाल पूछना चाहता हूं जो दावा करते थे कि भारत ‘हिटलर के शासन’ में चल रहा है और आज देश में तानाशाही या निरंकुशता है।’’ भाजपा सांसद ने कहा कि इन दावों के विपरीत देश में डर का माहौल बिल्कुल नहीं है।

पात्रा ने कहा, ‘‘लोकतंत्र का माहौल है। इसलिए जो लोग दावा करते थे कि देश में डर का माहौल है, मुझे लगता है कि अब ऐसा बयान देने से पहले वे दो बार सोचेंगे।’’
उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर दोनों निर्वाचन आयुक्तों द्वारा अपने पत्रों में अलग-अलग विचार व्यक्त किया जाना ‘‘लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत’’ है। पात्रा ने कहा कि ‘इस पूरे मामले’ को उच्चतम न्यायालय में ले जाया गया और शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी किए, यह भी इस बात का उदाहरण है कि लोकतंत्र काम कर रहा है।

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