बिहार के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी इन दिनों IPL 2026 में अपने धमाकेदार प्रदर्शन को लेकर सुर्खियों में हैं। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने शनिवार को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 36 गेंदों में 103 रन की विस्फोटक पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 12 छक्के और 5 चौके जड़े। यह पारी IPL के सबसे तेज शतकों में शामिल हो गई है। पिता के दोस्त बने पहले कोच, 5 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर वैभव का क्रिकेट सफर किसी बड़ी अकादमी से नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर के साधारण से मुखर्जी सेमिनरी मैदान से शुरू हुआ। उनके पहले कोच अतुल प्रियंकर न सिर्फ एक रणजी खिलाड़ी हैं, बल्कि वैभव के पिता के करीबी दोस्त भी हैं। पिता काम में व्यस्त रहते थे, इसलिए उन्होंने वैभव को अपने दोस्त अतुल के पास ट्रेनिंग के लिए भेजा। कोच अतुल प्रियंकर बताते हैं कि जब वैभव पहली बार मैदान पर आए, तब उनकी उम्र सिर्फ 5 साल थी। शुरुआत से ही उनमें अलग तरह का आत्मविश्वास और खेल के प्रति जुनून दिखता था। ‘बॉलर नहीं, गेंद देखो’ यही बना सबसे बड़ा मंत्र अतुल प्रियंकर ने वैभव को शुरुआती दिनों में एक बेसिक लेकिन बेहद अहम बात सिखाई। ‘क्रिकेट बॉलर को देखकर नहीं, गेंद को देखकर खेलना है।’ यही तकनीक आगे चलकर उनकी आक्रामक बल्लेबाजी की पहचान बन गई। आज भी उनकी बल्लेबाजी में वही आत्मविश्वास और टाइमिंग साफ नजर आती है। कोच के अनुसार, वैभव बचपन से ही अनुशासन में रहने वाले खिलाड़ी थे। रोजाना करीब 8 घंटे नेट पर समय बिताते थे। कभी प्रैक्टिस मिस नहीं किया। हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश की। करीब 3.5 साल तक उन्होंने मुजफ्फरपुर में ही ट्रेनिंग ली। इसके बाद उनके पिता समस्तीपुर ले गए, जहां उन्होंने अभ्यास जारी रखा। बाद में बेहतर अवसरों के लिए उन्हें रांची शिफ्ट किया गया। तब 5-10 बच्चे आते थे, अब 70 तक पहुंची संख्या कोच बताते हैं कि जब वैभव ट्रेनिंग लेते थे, तब मैदान पर गिनती के 5-10 खिलाड़ी ही आते थे। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अब उसी मैदान पर सुबह और शाम 60-70 बच्चे नियमित अभ्यास करते हैं। 5 साल से लेकर 14 साल तक के बच्चे क्रिकेट सीख रहे हैं। वैभव की सफलता ने पूरे इलाके में क्रिकेट को लेकर नई ऊर्जा भर दी है। गरीब बच्चों के लिए मुफ्त ट्रेनिंग, किट भी देते हैं कोच अतुल प्रियंकर सिर्फ कोचिंग ही नहीं देते, बल्कि जरूरतमंद बच्चों की मदद भी करते हैं। उनकी अकादमी में करीब 10 बच्चों को मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है। साथ ही उन्हें क्रिकेट किट भी उपलब्ध कराई जाती है। कोच का कहना है कि पैसों की कमी किसी भी बच्चे की प्रतिभा के रास्ते में नहीं आनी चाहिए। नई प्रतिभाएं भी आ रहीं सामने कोच अतुल प्रियंकर का कहना है कि वैभव के साथ खेलने वाले बच्चों में अब कई नए नाम उभर रहे हैं। 12 साल के अयान ने हाल ही में एक जिला टूर्नामेंट में 30 ओवर के मैच में 327 रन बनाकर सबका ध्यान खींचा है। आने वाले समय में इसी मैदान से कई और खिलाड़ी निकल सकते हैं। सपना: टीम इंडिया की जर्सी में देखना अतुल प्रियंकर कहते हैं कि वैभव शुरू से ही मेहनती रहे हैं और उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता बचपन से ही थी। उनका सपना है कि जल्द ही वैभव भारतीय टीम के लिए खेलते नजर आएं। मुजफ्फरपुर का यह छोटा सा मैदान अब बड़े सपनों की उड़ान का केंद्र बन चुका है। जहां से निकलकर वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी देश और दुनिया में अपना नाम रोशन कर रहे हैं। बिहार के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी इन दिनों IPL 2026 में अपने धमाकेदार प्रदर्शन को लेकर सुर्खियों में हैं। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने शनिवार को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 36 गेंदों में 103 रन की विस्फोटक पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 12 छक्के और 5 चौके जड़े। यह पारी IPL के सबसे तेज शतकों में शामिल हो गई है। पिता के दोस्त बने पहले कोच, 5 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर वैभव का क्रिकेट सफर किसी बड़ी अकादमी से नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर के साधारण से मुखर्जी सेमिनरी मैदान से शुरू हुआ। उनके पहले कोच अतुल प्रियंकर न सिर्फ एक रणजी खिलाड़ी हैं, बल्कि वैभव के पिता के करीबी दोस्त भी हैं। पिता काम में व्यस्त रहते थे, इसलिए उन्होंने वैभव को अपने दोस्त अतुल के पास ट्रेनिंग के लिए भेजा। कोच अतुल प्रियंकर बताते हैं कि जब वैभव पहली बार मैदान पर आए, तब उनकी उम्र सिर्फ 5 साल थी। शुरुआत से ही उनमें अलग तरह का आत्मविश्वास और खेल के प्रति जुनून दिखता था। ‘बॉलर नहीं, गेंद देखो’ यही बना सबसे बड़ा मंत्र अतुल प्रियंकर ने वैभव को शुरुआती दिनों में एक बेसिक लेकिन बेहद अहम बात सिखाई। ‘क्रिकेट बॉलर को देखकर नहीं, गेंद को देखकर खेलना है।’ यही तकनीक आगे चलकर उनकी आक्रामक बल्लेबाजी की पहचान बन गई। आज भी उनकी बल्लेबाजी में वही आत्मविश्वास और टाइमिंग साफ नजर आती है। कोच के अनुसार, वैभव बचपन से ही अनुशासन में रहने वाले खिलाड़ी थे। रोजाना करीब 8 घंटे नेट पर समय बिताते थे। कभी प्रैक्टिस मिस नहीं किया। हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश की। करीब 3.5 साल तक उन्होंने मुजफ्फरपुर में ही ट्रेनिंग ली। इसके बाद उनके पिता समस्तीपुर ले गए, जहां उन्होंने अभ्यास जारी रखा। बाद में बेहतर अवसरों के लिए उन्हें रांची शिफ्ट किया गया। तब 5-10 बच्चे आते थे, अब 70 तक पहुंची संख्या कोच बताते हैं कि जब वैभव ट्रेनिंग लेते थे, तब मैदान पर गिनती के 5-10 खिलाड़ी ही आते थे। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अब उसी मैदान पर सुबह और शाम 60-70 बच्चे नियमित अभ्यास करते हैं। 5 साल से लेकर 14 साल तक के बच्चे क्रिकेट सीख रहे हैं। वैभव की सफलता ने पूरे इलाके में क्रिकेट को लेकर नई ऊर्जा भर दी है। गरीब बच्चों के लिए मुफ्त ट्रेनिंग, किट भी देते हैं कोच अतुल प्रियंकर सिर्फ कोचिंग ही नहीं देते, बल्कि जरूरतमंद बच्चों की मदद भी करते हैं। उनकी अकादमी में करीब 10 बच्चों को मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है। साथ ही उन्हें क्रिकेट किट भी उपलब्ध कराई जाती है। कोच का कहना है कि पैसों की कमी किसी भी बच्चे की प्रतिभा के रास्ते में नहीं आनी चाहिए। नई प्रतिभाएं भी आ रहीं सामने कोच अतुल प्रियंकर का कहना है कि वैभव के साथ खेलने वाले बच्चों में अब कई नए नाम उभर रहे हैं। 12 साल के अयान ने हाल ही में एक जिला टूर्नामेंट में 30 ओवर के मैच में 327 रन बनाकर सबका ध्यान खींचा है। आने वाले समय में इसी मैदान से कई और खिलाड़ी निकल सकते हैं। सपना: टीम इंडिया की जर्सी में देखना अतुल प्रियंकर कहते हैं कि वैभव शुरू से ही मेहनती रहे हैं और उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता बचपन से ही थी। उनका सपना है कि जल्द ही वैभव भारतीय टीम के लिए खेलते नजर आएं। मुजफ्फरपुर का यह छोटा सा मैदान अब बड़े सपनों की उड़ान का केंद्र बन चुका है। जहां से निकलकर वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी देश और दुनिया में अपना नाम रोशन कर रहे हैं।


