भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ 45वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने वर्ष 2026 में बड़ी कार्रवाई करते हुए मादक पदार्थों, अवैध शराब, वायरलेस उपकरण, जाली नोट, मानव तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। शुक्रवार को वीरपुर स्थित 45वीं वाहिनी मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्णिया रेंज के डीआईजी मधुकर अमिताभ ने यह जानकारी दी। 44 आरोपियों को गिरफ्तार किया उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए SSB आसूचना आधारित अभियान, आधुनिक तकनीक और बिहार पुलिस समेत अन्य एजेंसियों के साथ संयुक्त कार्रवाई कर रही है। डीआईजी ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 3216 किलोग्राम गांजा, करीब 1900 नशीली टैबलेट और 5240 लीटर अवैध नेपाली शराब जब्त की गई है। इस दौरान शराब तस्करी के 44 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं एक देशी कट्टा, तीन हिरण के सींग और अन्य प्रतिबंधित सामग्री भी बरामद की गई। वर्ष 2025 में 61,500 रुपए के जाली भारतीय नोट बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। एक बांग्लादेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया मानव तस्करी के खिलाफ अभियान को भी बड़ी सफलता मिली है। डीआईजी के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 35 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया तथा 8 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया। जबकि वर्ष 2024 से अब तक कुल 110 लोगों का रेस्क्यू और 85 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। इसके अलावा नेपाल से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले एक बांग्लादेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीआईजी ने 20 जुलाई और 4 अगस्त को हुई दो महत्वपूर्ण कार्रवाइयों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को मिली खुफिया सूचना के आधार पर SSB और बिहार पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर एक स्कॉर्पियो वाहन को पकड़ा। तस्करों के पास वायरलेस सेट मिला तलाशी के दौरान वाहन सवार आरोपियों के पास से एक वायरलेस (वॉकी-टॉकी) सेट मिला, जिसे आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से तोड़ दिया। पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई में 500 बोतल यानी 152.7 लीटर नेपाली शराब बरामद की गई। वाहन, मोबाइल फोन और क्षतिग्रस्त वायरलेस सेट भी जब्त कर भीमनगर थाना को सौंप दिया गया। डीआईजी ने कहा कि तस्करों के पास वायरलेस सेट मिलना बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है। आमतौर पर तस्कर मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं, लेकिन वायरलेस संचार प्रणाली का इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि वे अधिक संगठित तरीके से काम कर रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे नेटवर्क का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की आवाजाही, मानव तस्करी और अन्य संगठित अपराधों में किया जा सकता है। इसी इनपुट के आधार पर 4 अगस्त को ग्राम राजपुरा (नेओर-डगमारा रोड) के पास एक अन्य स्कॉर्पियो वाहन से 100 चीनी निर्मित बाओफेंग वायरलेस कम्युनिकेशन डिवाइस (वॉकी-टॉकी) बरामद किए गए। सक्षम संस्था को भेजने की अनुशंसा साथ ही वाहन, मोबाइल फोन, नेपाल नागरिकता परिचय-पत्र, सेलर इनवॉइस, डिलीवरी स्लिप और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए गए। पूछताछ में सामने आया कि यह खेप नेपाल के राजबिराज निवासी अजीत यादव तक पहुंचाई जानी थी। जांच के दौरान कुनौली बाजार स्थित महावीर इलेक्ट्रॉनिक्स की संभावित संलिप्तता की भी जानकारी मिली। डीआईजी ने बताया कि बरामद सभी वायरलेस सेट नए, चीनी निर्मित और पहले से प्रोग्राम किए गए थे। तकनीकी जांच में वे आपस में सफलतापूर्वक संचार करने में सक्षम पाए गए। हालांकि उनका SSB के वर्तमान VHF नेटवर्क से कोई संपर्क स्थापित नहीं हुआ। BEMS के माध्यम से आवागमन की निगरानी विस्तृत तकनीकी परीक्षण के लिए इन्हें सक्षम संस्था को भेजने की अनुशंसा की गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच SSB, बिहार पुलिस, स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) तथा नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल (APF) संयुक्त रूप से कर रही हैं। जांच अभी जारी है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। डीआईजी ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत किया गया है। सीमा जांच चौकियों पर बॉर्डर एंट्री मैनेजमेंट सिस्टम (BEMS) के माध्यम से आवागमन की निगरानी की जा रही है। नदी क्षेत्रों में नाव और ड्रोन से निगरानी, नियमित दिन-रात गश्त तथा बिहार पुलिस के साथ संयुक्त पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि सीमा पार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा जा सके। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ 45वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने वर्ष 2026 में बड़ी कार्रवाई करते हुए मादक पदार्थों, अवैध शराब, वायरलेस उपकरण, जाली नोट, मानव तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। शुक्रवार को वीरपुर स्थित 45वीं वाहिनी मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्णिया रेंज के डीआईजी मधुकर अमिताभ ने यह जानकारी दी। 44 आरोपियों को गिरफ्तार किया उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए SSB आसूचना आधारित अभियान, आधुनिक तकनीक और बिहार पुलिस समेत अन्य एजेंसियों के साथ संयुक्त कार्रवाई कर रही है। डीआईजी ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 3216 किलोग्राम गांजा, करीब 1900 नशीली टैबलेट और 5240 लीटर अवैध नेपाली शराब जब्त की गई है। इस दौरान शराब तस्करी के 44 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं एक देशी कट्टा, तीन हिरण के सींग और अन्य प्रतिबंधित सामग्री भी बरामद की गई। वर्ष 2025 में 61,500 रुपए के जाली भारतीय नोट बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। एक बांग्लादेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया मानव तस्करी के खिलाफ अभियान को भी बड़ी सफलता मिली है। डीआईजी के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 35 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया तथा 8 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया। जबकि वर्ष 2024 से अब तक कुल 110 लोगों का रेस्क्यू और 85 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। इसके अलावा नेपाल से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले एक बांग्लादेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीआईजी ने 20 जुलाई और 4 अगस्त को हुई दो महत्वपूर्ण कार्रवाइयों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को मिली खुफिया सूचना के आधार पर SSB और बिहार पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर एक स्कॉर्पियो वाहन को पकड़ा। तस्करों के पास वायरलेस सेट मिला तलाशी के दौरान वाहन सवार आरोपियों के पास से एक वायरलेस (वॉकी-टॉकी) सेट मिला, जिसे आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से तोड़ दिया। पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई में 500 बोतल यानी 152.7 लीटर नेपाली शराब बरामद की गई। वाहन, मोबाइल फोन और क्षतिग्रस्त वायरलेस सेट भी जब्त कर भीमनगर थाना को सौंप दिया गया। डीआईजी ने कहा कि तस्करों के पास वायरलेस सेट मिलना बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है। आमतौर पर तस्कर मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं, लेकिन वायरलेस संचार प्रणाली का इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि वे अधिक संगठित तरीके से काम कर रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे नेटवर्क का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की आवाजाही, मानव तस्करी और अन्य संगठित अपराधों में किया जा सकता है। इसी इनपुट के आधार पर 4 अगस्त को ग्राम राजपुरा (नेओर-डगमारा रोड) के पास एक अन्य स्कॉर्पियो वाहन से 100 चीनी निर्मित बाओफेंग वायरलेस कम्युनिकेशन डिवाइस (वॉकी-टॉकी) बरामद किए गए। सक्षम संस्था को भेजने की अनुशंसा साथ ही वाहन, मोबाइल फोन, नेपाल नागरिकता परिचय-पत्र, सेलर इनवॉइस, डिलीवरी स्लिप और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए गए। पूछताछ में सामने आया कि यह खेप नेपाल के राजबिराज निवासी अजीत यादव तक पहुंचाई जानी थी। जांच के दौरान कुनौली बाजार स्थित महावीर इलेक्ट्रॉनिक्स की संभावित संलिप्तता की भी जानकारी मिली। डीआईजी ने बताया कि बरामद सभी वायरलेस सेट नए, चीनी निर्मित और पहले से प्रोग्राम किए गए थे। तकनीकी जांच में वे आपस में सफलतापूर्वक संचार करने में सक्षम पाए गए। हालांकि उनका SSB के वर्तमान VHF नेटवर्क से कोई संपर्क स्थापित नहीं हुआ। BEMS के माध्यम से आवागमन की निगरानी विस्तृत तकनीकी परीक्षण के लिए इन्हें सक्षम संस्था को भेजने की अनुशंसा की गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच SSB, बिहार पुलिस, स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) तथा नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल (APF) संयुक्त रूप से कर रही हैं। जांच अभी जारी है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। डीआईजी ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत किया गया है। सीमा जांच चौकियों पर बॉर्डर एंट्री मैनेजमेंट सिस्टम (BEMS) के माध्यम से आवागमन की निगरानी की जा रही है। नदी क्षेत्रों में नाव और ड्रोन से निगरानी, नियमित दिन-रात गश्त तथा बिहार पुलिस के साथ संयुक्त पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि सीमा पार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा जा सके।


