Spying Scandal ने Southampton को डुबोया, Playoff Final से बाहर, Players भी करेंगे केस

Spying Scandal ने Southampton को डुबोया, Playoff Final से बाहर, Players भी करेंगे केस

इंग्लैंड के फुटबॉल जगत में इस समय साउथैम्पटन क्लब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्लब पर दूसरी टीमों की ट्रेनिंग सत्र की जासूसी कराने के आरोप साबित होने के बाद इंग्लैंड फुटबॉल लीग ने उसे चैंपियनशिप प्लेऑफ फाइनल से बाहर कर दिया है। इस फैसले के बाद अब क्लब के अपने खिलाड़ी भी नाराज बताए जा रहे हैं और आर्थिक नुकसान को लेकर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार, साउथैम्पटन के खिलाड़ियों का मानना है कि अगर टीम प्रीमियर लीग में पहुंच जाती तो उन्हें वेतन बढ़ोतरी, बोनस और प्रमोशन राशि का फायदा मिलता। लेकिन क्लब के खिलाफ हुई कार्रवाई के कारण अब यह मौका हाथ से निकल गया है। इसी वजह से कई खिलाड़ी प्रोफेशनल फुटबॉलर्स एसोसिएशन से कानूनी सलाह लेने पर विचार कर रहे हैं।बता दें कि इंग्लैंड फुटबॉल लीग की स्वतंत्र अनुशासन समिति ने साउथैम्पटन को मिडिल्सब्रा, ऑक्सफोर्ड और इप्सविच की ट्रेनिंग की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग कराने का दोषी पाया था। इसके बाद क्लब को प्लेऑफ फाइनल से बाहर करने के साथ अगले सत्र के लिए चार अंक काटने की सजा भी सुनाई गई है।इस फैसले के बाद मिडिल्सब्रा को दोबारा फाइनल में जगह दे दी गई है। अब शनिवार को वेम्बली में होने वाले फाइनल मुकाबले में हल सिटी का सामना मिडिल्सब्रा से होना तय माना जा रहा है। हालांकि साउथैम्पटन ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है और क्लब का कहना है कि सजा जरूरत से ज्यादा कठोर है।गौरतलब है कि इस पूरे मामले में क्लब के युवा विश्लेषक विलियम साल्ट का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। आरोप है कि वह पेड़ों और झाड़ियों के पीछे छिपकर मिडिल्सब्रा की ट्रेनिंग रिकॉर्ड कर रहे थे, जहां उन्हें पकड़ा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, टोंडा एकर्ट समेत क्लब के कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।फुटबॉल एसोसिएशन अब इस मामले में अलग से कार्रवाई कर सकता है। माना जा रहा है कि संबंधित कर्मचारियों पर खेल की छवि खराब करने के आरोप लगाए जा सकते हैं। बता दें कि इससे पहले वर्ष 2024 में कनाडा महिला फुटबॉल टीम की पूर्व कोच बेव प्रीस्टमैन और उनके सहयोगियों पर भी ड्रोन के जरिए जासूसी कराने के मामले में एक साल का प्रतिबंध लगाया गया था।साउथैम्पटन की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। क्लब के ड्रेसिंग रूम में भी माहौल खराब बताया जा रहा है। खिलाड़ियों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है और कई खिलाड़ी प्रबंधन से जवाब मांग रहे हैं। क्लब प्रबंधन अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ खिलाड़ियों के असंतोष से भी जूझता नजर आ रहा है।उधर मिडिल्सब्रा क्लब ने लीग के फैसले का स्वागत किया है। क्लब का कहना है कि यह फैसला खेल की निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए जरूरी था। टीम ने फाइनल की तैयारी भी शुरू कर दी है और खिलाड़ियों को दोबारा अभ्यास के लिए बुला लिया गया है।गौरतलब है कि साउथैम्पटन द्वारा जिन मुकाबलों से पहले जासूसी की गई थी, उनमें टीम को खास फायदा नहीं मिला था। क्लब ऑक्सफोर्ड से हार गया था, जबकि इप्सविच और मिडिल्सब्रा के खिलाफ मुकाबले ड्रॉ रहे थे। इसके बावजूद नियमों के उल्लंघन को गंभीर माना गया और सख्त कार्रवाई की गई है। 

इंग्लैंड के फुटबॉल जगत में इस समय साउथैम्पटन क्लब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्लब पर दूसरी टीमों की ट्रेनिंग सत्र की जासूसी कराने के आरोप साबित होने के बाद इंग्लैंड फुटबॉल लीग ने उसे चैंपियनशिप प्लेऑफ फाइनल से बाहर कर दिया है। इस फैसले के बाद अब क्लब के अपने खिलाड़ी भी नाराज बताए जा रहे हैं और आर्थिक नुकसान को लेकर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, साउथैम्पटन के खिलाड़ियों का मानना है कि अगर टीम प्रीमियर लीग में पहुंच जाती तो उन्हें वेतन बढ़ोतरी, बोनस और प्रमोशन राशि का फायदा मिलता। लेकिन क्लब के खिलाफ हुई कार्रवाई के कारण अब यह मौका हाथ से निकल गया है। इसी वजह से कई खिलाड़ी प्रोफेशनल फुटबॉलर्स एसोसिएशन से कानूनी सलाह लेने पर विचार कर रहे हैं।
बता दें कि इंग्लैंड फुटबॉल लीग की स्वतंत्र अनुशासन समिति ने साउथैम्पटन को मिडिल्सब्रा, ऑक्सफोर्ड और इप्सविच की ट्रेनिंग की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग कराने का दोषी पाया था। इसके बाद क्लब को प्लेऑफ फाइनल से बाहर करने के साथ अगले सत्र के लिए चार अंक काटने की सजा भी सुनाई गई है।
इस फैसले के बाद मिडिल्सब्रा को दोबारा फाइनल में जगह दे दी गई है। अब शनिवार को वेम्बली में होने वाले फाइनल मुकाबले में हल सिटी का सामना मिडिल्सब्रा से होना तय माना जा रहा है। हालांकि साउथैम्पटन ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है और क्लब का कहना है कि सजा जरूरत से ज्यादा कठोर है।
गौरतलब है कि इस पूरे मामले में क्लब के युवा विश्लेषक विलियम साल्ट का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। आरोप है कि वह पेड़ों और झाड़ियों के पीछे छिपकर मिडिल्सब्रा की ट्रेनिंग रिकॉर्ड कर रहे थे, जहां उन्हें पकड़ा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, टोंडा एकर्ट समेत क्लब के कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।
फुटबॉल एसोसिएशन अब इस मामले में अलग से कार्रवाई कर सकता है। माना जा रहा है कि संबंधित कर्मचारियों पर खेल की छवि खराब करने के आरोप लगाए जा सकते हैं। बता दें कि इससे पहले वर्ष 2024 में कनाडा महिला फुटबॉल टीम की पूर्व कोच बेव प्रीस्टमैन और उनके सहयोगियों पर भी ड्रोन के जरिए जासूसी कराने के मामले में एक साल का प्रतिबंध लगाया गया था।
साउथैम्पटन की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। क्लब के ड्रेसिंग रूम में भी माहौल खराब बताया जा रहा है। खिलाड़ियों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है और कई खिलाड़ी प्रबंधन से जवाब मांग रहे हैं। क्लब प्रबंधन अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ खिलाड़ियों के असंतोष से भी जूझता नजर आ रहा है।
उधर मिडिल्सब्रा क्लब ने लीग के फैसले का स्वागत किया है। क्लब का कहना है कि यह फैसला खेल की निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए जरूरी था। टीम ने फाइनल की तैयारी भी शुरू कर दी है और खिलाड़ियों को दोबारा अभ्यास के लिए बुला लिया गया है।
गौरतलब है कि साउथैम्पटन द्वारा जिन मुकाबलों से पहले जासूसी की गई थी, उनमें टीम को खास फायदा नहीं मिला था। क्लब ऑक्सफोर्ड से हार गया था, जबकि इप्सविच और मिडिल्सब्रा के खिलाफ मुकाबले ड्रॉ रहे थे। इसके बावजूद नियमों के उल्लंघन को गंभीर माना गया और सख्त कार्रवाई की गई है।

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