सुप्रीम कोर्ट में विशेष लोक अदालत का आयोजन:21-23 अगस्त को मध्यस्थता से लंबित मामले निपटाए जाएंगे, गूगल फॉर्म से रिक्वेस्ट कर सकते हैं सबमिट

सुप्रीम कोर्ट में विशेष लोक अदालत का आयोजन:21-23 अगस्त को मध्यस्थता से लंबित मामले निपटाए जाएंगे, गूगल फॉर्म से रिक्वेस्ट कर सकते हैं सबमिट

सुप्रीम कोर्ट ‘पार्टिसिपेटिव जस्टिस’ और ‘डोरस्टेप डिलीवरी ऑफ जस्टिस’ के अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए ‘समाधान समारोह’ का आयोजन कर रहा है। यह पहल 21 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को एक विशेष लोक अदालत के साथ समाप्त होगी। इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों को सहमति-आधारित मध्यस्थता के माध्यम से आपसी समझौते से निपटाना है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी वकीलों, वादियों और संबंधित पक्षों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है। पक्षकार अपने विवादों को सुलझाने के लिए भौतिक रूप से या वर्चुअल माध्यम से, दोनों तरीकों से भाग ले सकते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए यह प्रक्रिया आसान और सुविधाजनक बनाई गई है। गूगल फॉर्म के जरिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं सबमिट इच्छुक पक्ष और उनके वकील दिए गए गूगल फॉर्म (https://forms.gle/jqxefqF4BCWzukoP6) के माध्यम से अपनी रिक्वेस्ट सबमिट कर सकते हैं। यह फॉर्म सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट (https://www.sci.gov.in/) पर भी उपलब्ध है। किसी भी प्रकार की सहायता और जानकारी के लिए वन स्टॉप सेंटर के वार रूम में स्थापित समाधान समारोह के नंबर जारी किए गए हैं: 011-23112428, 011-23112528, लैंडलाइन: 011-23116464, और डायरेक्टर, सीआरपी: 011-23115652। अदालतों पर बोझ होगा कम व्यवहार न्यायालय के कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम न्याय प्रक्रिया को तेज, कम खर्चीला और पक्षकारों के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्यस्थता के माध्यम से मामले सुलझने से अदालतों पर बोझ कम होगा और पक्षकारों को जल्द न्याय मिल सकेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह प्रयास डिजिटल इंडिया और सहभागी न्याय की अवधारणा को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर मामले मध्यस्थता से सुलझ गए तो न्यायिक व्यवस्था की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। सुप्रीम कोर्ट ‘पार्टिसिपेटिव जस्टिस’ और ‘डोरस्टेप डिलीवरी ऑफ जस्टिस’ के अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए ‘समाधान समारोह’ का आयोजन कर रहा है। यह पहल 21 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को एक विशेष लोक अदालत के साथ समाप्त होगी। इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों को सहमति-आधारित मध्यस्थता के माध्यम से आपसी समझौते से निपटाना है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी वकीलों, वादियों और संबंधित पक्षों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है। पक्षकार अपने विवादों को सुलझाने के लिए भौतिक रूप से या वर्चुअल माध्यम से, दोनों तरीकों से भाग ले सकते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए यह प्रक्रिया आसान और सुविधाजनक बनाई गई है। गूगल फॉर्म के जरिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं सबमिट इच्छुक पक्ष और उनके वकील दिए गए गूगल फॉर्म (https://forms.gle/jqxefqF4BCWzukoP6) के माध्यम से अपनी रिक्वेस्ट सबमिट कर सकते हैं। यह फॉर्म सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट (https://www.sci.gov.in/) पर भी उपलब्ध है। किसी भी प्रकार की सहायता और जानकारी के लिए वन स्टॉप सेंटर के वार रूम में स्थापित समाधान समारोह के नंबर जारी किए गए हैं: 011-23112428, 011-23112528, लैंडलाइन: 011-23116464, और डायरेक्टर, सीआरपी: 011-23115652। अदालतों पर बोझ होगा कम व्यवहार न्यायालय के कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम न्याय प्रक्रिया को तेज, कम खर्चीला और पक्षकारों के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्यस्थता के माध्यम से मामले सुलझने से अदालतों पर बोझ कम होगा और पक्षकारों को जल्द न्याय मिल सकेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह प्रयास डिजिटल इंडिया और सहभागी न्याय की अवधारणा को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर मामले मध्यस्थता से सुलझ गए तो न्यायिक व्यवस्था की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।  

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