‘तो कभी राजनीति में नहीं आती’: करारी हार के स्वप्रा बर्मन का छलका दर्द, सरकारी नौकरी छोड़ लड़ा था चुनाव

‘तो कभी राजनीति में नहीं आती’: करारी हार के स्वप्रा बर्मन का छलका दर्द, सरकारी नौकरी छोड़ लड़ा था चुनाव

Swapna Barman: करारी हार के बाद टीएमसी स्वप्ना बर्मन ने कहा कि परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता था कि राजनीति में इतना दर्द है। नहीं तो मैं राजनीति में आती ही नहीं। 

TMC Candidate Swapna Barman: एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त एथलीट स्वप्ना बर्मन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के टिकट पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़कर बुरी तरह हार गई हैं। अब वे अपने इस फैसले पर पछतावा जता रही हैं। स्वप्ना ने कहा, ‘मुझे नहीं पता था कि राजनीति में इतना दर्द है। नहीं तो मैं राजनीति में आती ही नहीं।’ स्वप्ना अब राजनीति से दूर रहने और खेल पर फिर से फोकस करने के बारे में सोच रही हैं।

सरकारी नौकरी छोड़कर लड़ी थी टीएमएसी टिकट पर चुनाव

राजगंज (एससी) विधानसभा सीट से टीएमसी उम्मीदवार स्वप्ना बर्मन को भाजपा के दिनेश सरकार के हाथों करीब 21,477 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। फरवरी 2026 में टीएमसी में शामिल होने वाली स्वप्ना ने चुनाव लड़ने के लिए रेलवे की स्थायी नौकरी छोड़ दी थी। अब हार के बाद आर्थिक संकट, परिवार की सुरक्षा और भविष्य की चिंता उन्हें सता रही है।

गुंड़ों ने पैतृक घर में लगा दी आग

हार के कुछ दिन बाद रात स्वप्ना के जलपाईगुड़ी स्थित पुराने पैतृक घर में आग लग गई। स्वप्ना ने आरोप लगाया कि गुंडों ने जानबूझकर आग लगाई। उन्होंने कोतवाली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उस समय किसी टीएमसी नेता के साथ नहीं थीं। घटना के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कुछ रिश्तेदार और पड़ोसी भी अब उनसे दूरी बनाने लगे हैं।

स्वप्ना ने आगे कहा कि मैं हमेशा स्पोर्ट्स में रही हूं, लेकिन राजनीति अलग है। मुझे सोचने दीजिए कि आने वाले दिनों में क्या करूंगी। टीएमसी नेताओं महुआ गोपी, प्रकाश सी बराईक और अष्टमी रॉय ने उनके घर पहुंचकर सांत्वना दी। प्रकाश ने कहा कि चुनाव में कोई भी हार सकता है। स्वप्ना देश की संपत्ति हैं।

एशियन गेम्स में भागीदारी पर संकट

हार के बाद स्वप्ना एशियन गेम्स की तैयारी भी प्रभावित हुई। वे दो क्वालीफाइंग राउंड में हिस्सा नहीं ले पाईं, जिससे अगस्त में होने वाले एशियन गेम्स में उनकी भागीदारी पर संकट मंडराने लगा। करीबियों का कहना है कि अब उनके सामने पैसों की भारी किल्लत खड़ी हो गई है। नौकरी गई, चुनाव हारा और खेल करियर भी प्रभावित।

  

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