Sleep Paralysis: रात को गहरी नींद में अचानक आंख खुल जाए, आप चिल्लाना चाहें लेकिन गले से आवाज बाहर न निकले और ऐसा लगे कि सीने पर किसी ने बहुत भारी पत्थर रख दिया है अगर आपके साथ कभी ऐसा हुआ है, तो यकीन मानिए यह किसी बुरे सपने से कहीं ज्यादा डरावना अनुभव होता है। बहुत से लोग इसे भूत-प्रेत या कोई साया मानकर डर जाते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस इसे एक आम न्यूरोलॉजिकल स्थिति मानता है जिसे स्लीप पैरालिसिस (Sleep Paralysis) कहते हैं। एनएचएस (NHS) की रिपोर्ट्स भी साफ कहती हैं कि सोते या जागते समय शरीर का कुछ पलों के लिए सुन्न पड़ जाना इसी का नतीजा होता है। आइए जानते हैं कि आखिर नींद के दौरान ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
शरीर के साथ ऐसा क्या होता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब हम सोते हैं, तो हमारा शरीर एक खास दौर से गुजरता है जिसे रेम (REM) स्लीप कहते हैं। इसी दौरान हमें सपने आते हैं। दिमाग हमारी मांसपेशियों को थोड़ी देर के लिए बिल्कुल सुन्न या पैरालाइज कर देता है, ताकि हम सपने में जो भाग रहे हैं या हाथ-पैर चला रहे हैं, उसे असलियत में न करने लगें वरना खुद को चोट लगा बैठेंगे। लेकिन कई बार गड़बड़ यह होती है कि दिमाग तो नींद से बाहर आ जाता है और इंसान होश में आ जाता है, पर मांसपेशियों का वह ‘सुन्न रहने वाला मोड’ कुछ सेकंड या मिनटों के लिए वैसा ही रह जाता है। नतीजा यह होता है कि आप जाग चुके होते हैं, सब कुछ महसूस कर सकते हैं, पर न तो हिल-डुल सकते हैं और न ही मुंह से एक शब्द बोल पाते हैं।
कैसे पहचानें Sleep Paralysis के लक्षण?
- आंखें खुली हैं, कमरा साफ दिख रहा है, लेकिन हाथ और पैर ज़मीन पर जड़े हुए लगते हैं।
- आवाज का गले में ही अटकना।
- सीने पर भारी दबाव।
- डर और अजीब सा भ्रम।
किन लोगों को होती है यह दिक्कत?
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, स्लीप पैरालिसिस किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ खास बातें इसे और बढ़ा देती हैं;
- रातभर जागना, शिफ्ट में काम करना या सोने का कोई पक्का समय न होना।
- दिनभर की भागदौड़, मानसिक चिंता या डिप्रेशन इस समस्या को सीधा बुलावा देते हैं।
- पीठ के बल सोना।
- नींद या एंग्जायटी की कुछ दवाइयों को छोड़ देने से भी ऐसा हो सकता है।
इस अनुभव से बचने के तरीके
- हर रात एक ही समय पर सोने जाएं और सुबह एक ही वक्त पर उठें।
- शरीर को कम से कम 7-8 घंटे की की नींद चाहिए।
- पीठ के बल सोने के बजाय करवट लेकर सोना शुरू कर दें।
- सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन, टीवी और लैपटॉप से दूरी बना लें।
- घबराएं नहीं, धैर्य रखें।
रात को नींद के दौरान होने वाली यह सुन्नता और घबराहट भले ही किसी भयानक सपने जैसी लगे, लेकिन यह हमारे शरीर और दिमाग के बीच तालमेल बिगड़ने का एक सीधा संकेत है। इसे किसी भूत-प्रेत या अंधविश्वास से जोड़कर डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, बल्कि अपनी बिगड़ी हुई जीवनशैली को सुधारने की जरूरत है। अगर हम समय पर सोना शुरू कर दें, तनाव को खुद पर हावी न होने दें और सोने की सही पोजीशन (करवट लेकर) अपनाएं, तो इस परेशानी से आसानी से बचा जा सकता है। याद रखिए, अच्छी और गहरी नींद ही सेहतमंद ज़िंदगी की सबसे बड़ी चाबी है। इसलिए अपनी नींद से समझौता न करें और अगर यह समस्या ज़्यादा परेशान करे, तो डॉक्टर की मदद लेने में ज़रा भी संकोच न करें।

