Siang Project को लेकर अरुणाचल के मंत्री बोले, सुरक्षा और स्थानीय हित दोनों जरूरी

Siang Project को लेकर अरुणाचल के मंत्री बोले, सुरक्षा और स्थानीय हित दोनों जरूरी

ईटानगर, सात अक्टूबर अरुणाचल प्रदेश के मंत्री ओजिंग तासिंग ने बुधवार को कहा कि प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देश्यीय परियोजना भारत की जल और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन स्थानीय समुदायों के हितों की भी रक्षा की जानी चाहिए। इस जलविद्युत परियोजना का सियांग क्षेत्र के स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि इससे विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण से जुड़े जोखिमों के कारण उनकी पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने सियांग नदी पर प्रस्तावित परियोजना के लिए जारी प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) से जुड़ी गतिविधियों और सर्वेक्षण कार्य को तत्काल रोकने तथा परियोजना से प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाबलों को वापस बुलाने की मांग की है। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह परियोजना राज्य और देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देगी, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी तथा जल और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी। खासकर नदी के ऊपरी हिस्से में चीन द्वारा प्रस्तावित विशाल बांध को लेकर चिंता के मद्देनजर इसे महत्वपूर्ण बताया गया है।

राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ओजिंग तासिंग ने बुधवार को कहा, ‘‘यह परियोजना भारत की जल और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब चीन नदी के ऊपरी हिस्से में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है, भारत को अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार रहना चाहिए कि हमारे जल संसाधन कभी भी हमारे देश पर दबाव बनाने का साधन न बनें।’’
सियांग जिले की पांगिन विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले तासिंग ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय हित और लोगों का कल्याण साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। देश के भविष्य को सुरक्षित करते हुए समान रूप से हमारी यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि परियोजना से प्रभावित प्रत्येक नागरिक और समुदाय के अधिकारों, हितों और कल्याण की रक्षा की जाए।’’
उन्होंने कहा कि सियांग के ऊपरी हिस्से में चीन द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे बुनियादी ढांचा विकास की अनदेखी भारत नहीं कर सकता।

तिब्बत में इस नदी को यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है, जो भारत में सियांग के नाम से प्रवेश करती है और आगे चलकर ब्रह्मपुत्र कहलाती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में टकराव के बजाय विश्वास, परामर्श और विकास पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए तथा सुरक्षित राष्ट्र और संरक्षित समुदाय सरकार की नीति के केंद्र में होने चाहिए। राज्य सरकार का कहना है कि परियोजना को केवल प्रस्ताव के आधार पर आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और पहले तकनीकी तथा अन्य वैधानिक आकलन पूरे करने होंगे।

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि अगर प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन के बाद परियोजना तकनीकी रूप से अव्यवहार्य पाई गई तो इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। खांडू ने कहा कि अगर यह व्यवहार्य पाई गई तो सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव के अध्ययन सहित आगे के आकलन किए जाएंगे।

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