अक्षय तृतीया पर 19 को बजेंगी शहनाइयां, भीलवाड़ा के बाजारों में उमड़ा ग्रामीणों का सैलाब

अक्षय तृतीया पर 19 को बजेंगी शहनाइयां, भीलवाड़ा के बाजारों में उमड़ा ग्रामीणों का सैलाब

अबूझ सावे अक्षय तृतीया (आखातीज) को लेकर वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में अभी से उत्साह और उल्लास नजर आ रहा है। आगामी 19 अप्रेल को मनाई जाने वाली अक्षय तृतीया पर जिले भर में शादियों की धूम रहेगी। इस महासावे की तैयारियों का सीधा असर शहर के बाजारों में ‘मुस्कुराहट’ के रूप में देखा जा रहा है। शादी-ब्याह की खरीदारी के लिए ग्रामीण अंचलों से लोगों का हुजूम शहर की तरफ उमड़पड़ा है।

बाजारों में लौटी रौनक, व्यापारियों के चेहरे खिले

शादियों की सीजनल खरीदारी के चलते शहर के प्रमुख बाजारों में इन दिनों त्योहारी माहौल है। आजाद चौक, सदर बाजार और सर्राफा बाजार सहित शहर के अन्य प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों पर सुबह से लेकर देर शाम तक ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। ग्रामीण और शहरी लोग अपनी-अपनी पसंद और बजट के अनुसार जमकर खरीदारी कर रहे हैं। सर्राफा बाजार में जहां महिलाएं और परिवार के बुजुर्ग सोने-चांदी के आभूषणों की खरीदारी में व्यस्त हैं, वहीं कपड़े के बाजारों में भी बरी-बेश और राजस्थानी परिधानों की भारी मांग है।

19 को हर तरफ गूंजेंगे मंगल गीत

पंडित अशोक व्यास ने बताया कि अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है, इसलिए इस दिन बिना किसी मुहूर्त के विवाह संपन्न होते हैं। 19 अप्रेल को जिले के गांव-ढाणियों से लेकर शहर के मैरिज गार्डनों तक, हर तरफ बस शहनाइयों की गूंज और मंगल गीत सुनाई देंगे। लंबे समय बाद बाजारों में ग्राहकों की इतनी भारी भीड़ देखकर व्यापारियों में भी खासा उत्साह है।

दिगंबर जैन समाज में अक्षय तृतीया का बड़ा महत्व

दिगंबर जैन समाज वैशाख शुक्ल तृतीया 19 अप्रेल को अत्यंत हर्षोल्लास के साथ अक्षय तृतीया मनाएगा। प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के एक वर्ष की तपस्या के बाद गन्ने के रस (इक्षु रस) से प्रथम आहार ग्रहण करने की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। यह पर्व जैन धर्म में संयम, तपस्या और त्याग का प्रतीक है। इसे हस्तिनापुर के राजा श्रेयांश की ओर से भगवान आदिनाथ को आहार देने की घटना से जोड़ा जाता है। जैन मंदिरों में भगवान ऋषभदेव का अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजा की जाएगी।

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