सिर्फ 4 दिन में ही 2800 पॉइंट टूट गया सेंसेक्स, निवेशकों को 11 लाख करोड़ का नुकसान, जानिए इस बिकवाली के 5 बड़े कारण

सिर्फ 4 दिन में ही 2800 पॉइंट टूट गया सेंसेक्स, निवेशकों को 11 लाख करोड़ का नुकसान, जानिए इस बिकवाली के 5 बड़े कारण

Share Market में इन दिनों माहौल बिल्कुल ठंडा पड़ा हुआ है। निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है और हर छोटी तेजी के बाद बाजार में बिकवाली हावी हो जा रही है। मंगलवार को भी यही तस्वीर देखने को मिली है। सिर्फ चार दिनों में निवेशकों की करीब 11 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई है। बीएसई सेंसेक्स आज कारोबार के दौरान 849 अंक टूटकर 75,164 तक पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 भी करीब 1 फीसदी फिसलकर 23,614 के स्तर तक आ गया। बीते चार कारोबारी दिनों में सेंसेक्स करीब 2800 अंक यानी 3 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है।

बाजार में आई इस कमजोरी का असर सिर्फ इंडेक्स तक सीमित नहीं रहा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी तेजी से घटा है। 6 मई को जहां यह करीब 473 लाख करोड़ रुपये था, वहीं मंगलवार सुबह यह घटकर 462 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

आखिर बाजार में इतनी घबराहट क्यों है?

  1. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई बेचैनी

दुनिया की नजर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर टिकी हुई है। युद्धविराम और बातचीत की कोशिशों के बावजूद मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। कभी सुलह की उम्मीद बनती है तो कभी हालात फिर बिगड़ने लगते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में शांति वार्ता को लेकर सख्त बयान दिया। दूसरी तरफ ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं। बाजार में डर बना हुआ है कि अगर हालात और बिगड़े तो तेल की कीमतें और उछल सकती हैं।

  1. कच्चे तेल की कीमतें बनी बड़ी चिंता

ब्रेंट क्रूड पिछले दो महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा तेल सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है। तेल महंगा होने से सरकार का खर्च बढ़ता है, महंगाई तेज होती है और आम लोगों की जेब पर असर पड़ता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। बाजार को डर है कि अगर तेल और महंगा हुआ तो आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

  1. रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

भारतीय रुपये की हालत भी कमजोर होती जा रही है। मंगलवार को रुपया 35 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। साल की शुरुआत में रुपया करीब 90 प्रति डॉलर के आसपास था। यानी अब तक इसमें 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों का भरोसा और कम करता है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिखता है।

  1. विदेशी निवेशक लगातार बेच रहे शेयर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी FPI पिछले कई महीनों से भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। जुलाई 2025 से अब तक वे करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। सिर्फ मई महीने में ही विदेशी निवेशकों ने लगभग 19,500 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। जब विदेशी पैसा बाजार से बाहर जाता है, तो बाजार पर दबाव बढ़ना तय माना जाता है।

  1. डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दबाव

अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। इसके साथ ही अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड भी तेजी से बढ़ी है। अभी यह करीब 4.42 फीसदी पर पहुंच चुकी है। जब अमेरिका में बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलता है तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर वहां लगाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि भारतीय बाजार में कमजोरी लगातार बनी हुई है।

फिलहाल बाजार का मूड पूरी तरह खबरों के भरोसे चल रहा है। जब तक अमेरिका-ईरान तनाव, महंगा तेल और विदेशी बिकवाली जैसे मुद्दों पर राहत नहीं मिलती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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