Schistosomiasis Symptoms: हम अक्सर यही सोचते हैं कि नदी या तालाब के गंदे पानी से सिर्फ पेट खराब होता है, दस्त लगते हैं या त्वचा पर खुजली होती है। The Lancet की एक रिपोर्ट के अनुसार, ठहरे हुए और गंदे पानी में नहाने या कपड़े धोने से महिलाओं को एक ऐसी बीमारी हो रही है जो उनके अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। इस बीमारी की वजह से महिलाओं के मां बनने तक में दिक्कत आ सकती है।
आइए जानते हैं कि क्या होती है शिस्टोसोमियासिस? इसके कारण और लक्षण क्या हैं?
क्या होती है शिस्टोसोमियासिस?
शिस्टोसोमियासिस (Schistosomiasis) एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जो गंदे और ठहरे हुए पानी में रहने वाले एक बेहद छोटे परजीवी (पैरासाइट यानी बारीक कीड़े) की वजह से फैलती है। इसे आम बोलचाल की भाषा में घोंघा बुखार (Snail Fever) भी कहा जाता है, क्योंकि इस कीड़े को पनपने के लिए पानी में रहने वाले घोंघों (Snails) की जरूरत होती है।
महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक क्यों?
महिलाओं के मामले में यह बीमारी और भी ज्यादा घातक हो जाती है, जिसे मेडिकल की भाषा में फीमेल जेनाइटल शिस्टोसोमियासिस (FGS) कहते हैं। यह इन्फेक्शन महिलाओं के गर्भाशय (Uterus), फैलोपियन ट्यूब और सर्विक्स को बुरी तरह प्रभावित करता है।
लंबे समय तक इलाज न मिलने पर सूजन की वजह से अंदर की नसें और ट्यूब्स ब्लॉक हो जाती हैं। नसें बंद होने के कारण महिलाओं को मां बनने में बहुत बड़ी रुकावट आती है। अगर कोई गर्भवती महिला इसकी चपेट में आ जाए, तो गर्भ में पल रहे बच्चे को पूरा पोषण नहीं मिल पाता, जिससे गर्भपात (मिसकैरेज) या समय से पहले डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।
शिस्टोसोमियासिस (Schistosomiasis) के कारण?
- संक्रमित पानी का इस्तेमाल।
- पानी में मीठे पानी के घोंघों (Freshwater Snails) होना।
- खुले में शौच जाना।
इसके मुख्य लक्षण क्या हैं? (Schistosomiasis Symptoms)
- त्वचा पर खुजली या छोटे-छोटे दाने होना।
- तेज बुखार, शरीर में कंपकंपी, खांसी होना।
- मांसपेशियों में दर्द होना।
- पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहना।
- पेशाब या मल के रास्ते खून आना।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


