सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में बाघ और अन्य वन्यजीवों के साथ मानव संघर्ष तथा आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए जल्द ही वनकर्मियों और होमगार्ड को रबर गन उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही है। राज्य सरकार ने पूर्व में बजट में वनकर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जंगल में ट्रेकिंग, गश्त और पेट्रोलिंग करने वाले कर्मचारियों को बंदूकें उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इसी क्रम में करीब सवा साल पहले रणथम्भौर के तत्कालीन सीसीएफ की ओर से उच्चाधिकारियों को रबर गन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा गया था।
रबर गन की विशेषता
आमतौर पर 12-बोर पंप-एक्शन गन को रबर गन के रूप में उपयोग किया जाता है। यह नॉन-लेथल हथियार है, जो जानवरों या हमलावरों को गंभीर रूप से घायल किए बिना डराने और नियंत्रित करने में प्रभावी होता है। विशेष टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के जवानों को इनका उपयोग कराया जाता है।

अन्य राज्यों में उपयोग
मध्य प्रदेश, ओडिशा, केरल और हिमाचल प्रदेश के वन विभाग समय-समय पर रबर गन का उपयोग कर चुके हैं। इनसे वन्यजीवों को जान का खतरा नहीं रहता और वनकर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। वन विभाग ने पूर्व में बजट घोषणा के बाद रबर गन की मांग की थी। अब सरकार इस दिशा में काम कर रही है और यदि सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही वनकर्मियों को रबर गन उपलब्ध होने की उम्मीद है।
उपवन संरक्षक ने दी जानकारी
सरकार की ओर से सुरक्षा के लिए गन उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी। इस पर विभाग की ओर से रबर गन का प्रस्ताव भेजा गया है और इस दिशा में कार्य जारी है। हालांकि अभी तक लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। -मानस सिंह, उपवन संरक्षक रणथम्भौर बाघ परियोजना सवाईमाधोपुर।

बाघिन टी-124 रिद्धी का शावक दिखा
त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर बाघों का मूवमेंट थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार सुबह भी त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर बाघिन टी-124 यानि रिद्धी का शावक नजर आया। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सुबह करीब सवा छह बजे गणेश मार्ग पर मजार के पास बाधिन रिद्धी का शावक नजर आया। इससे पार्क भ्रमण पर जा रहे पर्यटक और त्रिनेत्र के दर्शनों के लिए जा रहे श्रद्धालु रोमांचित हो उठे। बाघ ने करीब दस मिनट तक मार्ग पर चहलकदमी की।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं ने इस नजारे को कैमरे में कैद किया। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ की लगातार मॉनिटरिंग की। हालांकि दस मिनट के बाद बाघ का रुख एक बार फिर से जंगल की ओर हो गया और इसके बाद एक बार फिर से मार्ग सुचारू हो सका और वन विभाग की टीम ने राहत की सांस ली।


