Sariska Mining: NGT में खुलासा, सेंचुरी से 10 किमी के भीतर चल रहीं खानें

Sariska Mining: NGT में खुलासा, सेंचुरी से 10 किमी के भीतर चल रहीं खानें

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास चल रहे खनन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अहम सुनवाई हुई। मामले में गठित जॉइंट कमेटी ने करीब 200 पेज की रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष पेश की। रिपोर्ट में सामने आया है कि सरिस्का सेंचुरी से एक से 10 किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं। कमेटी ने इस परिधि में खनन के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की अनुमति को जरूरी माना है।

सरिस्का परिधि के आसपास खानें संचालित

मामले की सुनवाई जस्टिस शिव कुमार सिंह के समक्ष हुई। जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट में माना गया है कि सरिस्का की निर्धारित परिधि के आसपास खानें संचालित हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ खानों के पास पर्यावरणीय अनुमति या एनओसी मौजूद है, जो दीया और सीया जैसे जिला एवं राज्य स्तर के पर्यावरण प्राधिकरणों से संबंधित बताई गई है।

रिपोर्ट में विशेष रूप से छह खानों का उल्लेख किया गया है। जॉइंट कमेटी के अनुसार इन छह खानों की सरिस्का सेंचुरी से दूरी 10 किलोमीटर के भीतर है। यह तथ्य इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि करीब छह माह पहले सरिस्का टाइगर रिजर्व के अधिकारियों की ओर से इन खानों की दूरी सेंचुरी से 10 किलोमीटर से अधिक बताई गई थी।

खानों की दूरी को लेकर अलग-अलग आंकड़े

अब जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट में अलग आकलन सामने आने के बाद सरिस्का अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दूरी का आकलन अलग-अलग स्थानों या बिंदुओं से किए जाने के कारण अंतर हो सकता है। इसके बावजूद छह खानों की दूरी को लेकर सामने आए अलग-अलग आंकड़ों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट में कुल 32 संचालित खानों का उल्लेख है, लेकिन इन सभी खानों की अलवर सरिस्का सेंचुरी से वास्तविक दूरी का अलग-अलग आकलन रिपोर्ट में नहीं दिया गया है। केवल छह खानों की दूरी 10 किलोमीटर के दायरे में होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अन्य खानों की स्थिति को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।

याचिकाकर्ता ने मांगा समय

एनजीटी में जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट मंगलवार को ही पेश की गई। रिपोर्ट काफी विस्तृत होने के कारण याचिकाकर्ता की ओर से इसका अध्ययन करने के लिए समय मांगा गया। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को तय की गई है।

अब अगली सुनवाई में जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट और सरिस्का के आसपास चल रहे खनन की वैधानिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। खासतौर पर यह देखा जाएगा कि 10 किलोमीटर की परिधि में संचालित खानों के पास एनबीडब्ल्यूएल की आवश्यक अनुमति है या नहीं। सरिस्का जैसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र के आसपास खनन को लेकर यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

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