RSS सदस्यों पर प्रतिबंध की सिफारिश पर भारत का जवाब, USCIRF को बताया ‘पक्षपाती संगठन’

RSS सदस्यों पर प्रतिबंध की सिफारिश पर भारत का जवाब, USCIRF को बताया ‘पक्षपाती संगठन’

Randhir Jaiswal on RSS: अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की मांग को पक्षपाती, भड़काऊ और अपमानजनक बताया है।

USCIRF पर टिप्पणी करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अमेरिकी संस्था भारत को लेकर लगातार अपमानजनक और भड़काऊ बयान देती रही है। रणधीर जायसवाल ने भारतीय पक्ष को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘यह एक पक्षपाती संगठन है। मेरा कहना है कि हमें ऐसे संगठनों से दूरी बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि उनका अपना एजेंडा है। उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है… हमें उम्मीद नहीं है कि USCIRF भारत के बहुलतावादी ढांचे की वास्तविकता को समझेगा या यहां विभिन्न समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को स्वीकार करेगा।’

क्या है पूरा मामला?

RSS प्रमुख मोहन भागवत का अगस्त 2026 के आखिरी सप्ताह में अमेरिका दौरा प्रस्तावित है। अमेरिकी संस्था USCIRF ने इसका विरोध किया है। USCIRF के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने मोहन भागवत की यात्रा का उल्लेख करते हुए ट्रंप प्रशासन से अमेरिका में RSS के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। हालांकि, उसकी सिफारिश डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए बाध्यकारी नहीं है।

USCIRF ने क्या कहा था?

USCIRF ने मोहन भागवत की यात्रा का विरोध करते हुए कहा था कि धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में अमेरिकी सरकार को ध्यान केंद्रित करना चाहिए। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब इस संस्था ने भारत विरोध बयान दिया हो। मार्च में भी USCIRF ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कथित धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए भारत की तीखी आलोचना की थी।

मोहन भागवत की अमेरिकी यात्रा कब?

RSS प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिकी यात्रा 29 अगस्त को प्रस्तावित है। वे न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम के तहत भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करेंगे। इस यात्रा का मकसद सामाजिक एकता, नागरिक जिम्मेदारी, संवाद और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देना है। मोहन भागवत की यह यात्रा RSS के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है।

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