Rotavirus Infection Cause: छोटे बच्चों में पेट खराब होना या उल्टी-दस्त होना काफी आम माना जाता है। लेकिन अगर बच्चे को बहुत तेज पानी जैसे दस्त और बार-बार उल्टी होने लगे, तो इसे साधारण सी बात समझकर टालना भारी पड़ सकता है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, 5 साल से छोटे बच्चों में यह लक्षण रोटावायरस (Rotavirus) संक्रमण के हो सकते हैं। यह वायरस बच्चों की आंतों पर हमला करता है और शरीर में पानी की गंभीर कमी पैदा कर सकता है। आइए समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इससे अपने बच्चे को कैसे बचाएं।
रोटावायरस क्या है और यह कैसे फैलता है?
मेयो क्लिनिक के अनुसार, रोटावायरस एक बेहद संक्रामक (तेजी से फैलने वाला) वायरस है जो छोटे बच्चों और शिशुओं के पेट व आंतों को संक्रमित करता है।यह वायरस संक्रमित बच्चे के मल (Poop) के जरिए पर्यावरण और चीजों तक पहुंचता है। अगर बच्चा गंदे हाथ मुंह में डाल ले, या रोटावायरस से दूषित खिलौने, बर्तनों व सतहों को छूने के बाद मुंह में हाथ लगाए, तो यह वायरस उसके पेट में चला जाता है। इसके अलावा गंदे पानी या दूषित खाने के जरिए भी यह आसानी से फैल जाता है।
इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं?
- शुरुआत में बुखार और उल्टी।
- पानी जैसे तेज दस्त।
- डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
मेयो क्लिनिक के अनुसार, रोटावायरस में सबसे बड़ा खतरा डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी का होता है। अगर बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो बिना एक मिनट गंवाए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें;
- बच्चे का बहुत चिड़चिड़ा होना या बहुत ज्यादा सुस्त पड़ जाना।
- रोते समय आंखों से आंसू न निकलना।
- 3-4 घंटे से ज्यादा समय तक पेशाब न करना (या सूखा डायपर रहना)।
- मुंह और जीभ का बिल्कुल सूखा दिखना।
- आंखें अंदर को धंसी हुई दिखना।
- दस्त में खून या मवाद आना या बच्चे को 102°F से ज्यादा तेज बुखार होना।
रोटावायरस से बचाव के उपाय
रोटावायरस के इलाज के लिए कोई खास एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा नहीं आती, इसलिए बचाव और पानी की पूर्ति ही इसका सबसे बड़ा इलाज है। CDC और मेयो क्लिनिक के अनुसार ये उपाय अपनाएं;
- रोटावायरस की वैक्सीन (टीकाकरण)।
- ORS और तरल पदार्थ दें।
- सफाई का रखें पूरा ध्यान।
- बच्चे के खेलने की जगह और उसके खिलौनों को साफ रखें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


