औरंगाबाद में बर्थडे सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर वसूली; VIDEO:शिकायतकर्ता से पहले डील कर रहा था कर्मी, कैमरा देखते ही भड़का

औरंगाबाद में बर्थडे सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर वसूली; VIDEO:शिकायतकर्ता से पहले डील कर रहा था कर्मी, कैमरा देखते ही भड़का

औरंगाबाद सदर अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें काउंटर पर मौजूद एक कर्मी पैसे लेते हुए दिखाई दे रहा है। आरोप है कि यह कर्मी स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी उदय पासवान है, जो प्रमाण पत्र में सुधार के नाम पर पैसे की मांग कर रहा था। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति काउंटर पर मौजूद कर्मी से बातचीत कर रहा है और पैसे देने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान दोनों के बीच पहले मोलभाव भी होता है। जैसे ही कर्मी को यह अहसास होता है कि उसका वीडियो बनाया जा रहा है, वह भड़क उठता है और कैमरा बंद करने को कहने लगता है, साथ ही फोन पर किसी अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश करता है। पीड़ित औरंगाबाद के कर्मा गांव निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वह अपने बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र में त्रुटि सुधार कराने के लिए कई दिनों से सदर अस्पताल के चक्कर लगा रहा था। आरोप है कि उससे 300 रुपये की मांग की गई। पहले उसके पास नकद पैसे नहीं होने पर उसे वापस लौटा दिया गया। बाद में जब वह कैश लेकर पहुंचा और 200 रुपये देने लगा, तो कर्मी ने 300 रुपये से कम लेने से इनकार कर दिया। काउंटर पर मौजूद महिला बोली कई महीने से चक्कर लगा रही हूं, पैसे की डिमांड की जाती है सदर अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाने में हो रही देरी और कथित वसूली को लेकर एक महिला ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। गया से आई स्वीटी कुमारी ने बताया कि वह पिछले करीब 10 महीनों से अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लगातार अस्पताल का चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि उनका मायका औरंगाबाद में है, जबकि ससुराल गया में है और उनके बच्चे का जन्म औरंगाबाद सदर अस्पताल में ही हुआ था। इसी आधार पर वह यहीं से प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास कर रही हैं। महिला का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान उनसे भी पैसे की मांग की गई, लेकिन बावजूद इसके उनका काम नहीं हुआ। स्वीटी कुमारी ने बताया कि उन्होंने पहली बार जुलाई महीने में आवेदन दिया था, जिसे विभाग द्वारा निरस्त कर दिया गया। इसके बाद फरवरी में दोबारा आवेदन किया, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि प्रमाण पत्र बनना संभव नहीं है तो स्पष्ट बता देना चाहिए, लेकिन बार-बार चक्कर लगवाकर परेशान किया जा रहा है। पैसा देने के बावजूद भी नहीं मिला जन्म प्रमाणपत्र राजपुर गांव की निवासी हनी कुमारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए काउंटर पर बैठे एक कर्मी को 500 रुपये दिए, इसके बावजूद अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। हनी कुमारी ने बताया कि उनके बच्चे का जन्म दो महीने पहले सदर अस्पताल में हुआ था। इसके बाद से वह लगातार प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रही हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार कहने पर भी उनका काम नहीं हो रहा है और उन्हें टालमटोल किया जा रहा है। महिला का कहना है कि पैसे देने के बावजूद जब काम नहीं हो रहा, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस मामले ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले भी जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर वसूली करने का लगता रहा है आरोप सदर अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर वसूली का यह मामला नया नहीं है। इससे पहले भी यहां कार्यरत कर्मियों पर अवैध वसूली के आरोप लगते रहे हैं। आरोपों के सत्य पाए जाने पर पूर्व में सुशील कुमार को पद से हटाया जा चुका है। इसके बाद इस कार्य की जिम्मेदारी साहिल कुमार को दी गई थी, लेकिन उन्होंने भी यहां व्याप्त अनियमितताओं को देखते हुए तत्कालीन उपाधीक्षक को आवेदन देकर खुद को इस कार्य से अलग करने की मांग की थी। इसके बाद एक अन्य कर्मी को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन स्थिति में खास सुधार नहीं हो पाया। लोगों का आरोप है कि जानबूझकर आवेदन प्रक्रिया को लंबा खींचा जाता है, ताकि आवेदक परेशान होकर पैसे देने को मजबूर हो जाएं।गौरतलब है कि नियम के अनुसार सदर अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र मरीज को अस्पताल में ही उपलब्ध करा दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद लोगों को बार-बार चक्कर लगाना पड़ रहा है, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। औरंगाबाद सदर अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें काउंटर पर मौजूद एक कर्मी पैसे लेते हुए दिखाई दे रहा है। आरोप है कि यह कर्मी स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी उदय पासवान है, जो प्रमाण पत्र में सुधार के नाम पर पैसे की मांग कर रहा था। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति काउंटर पर मौजूद कर्मी से बातचीत कर रहा है और पैसे देने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान दोनों के बीच पहले मोलभाव भी होता है। जैसे ही कर्मी को यह अहसास होता है कि उसका वीडियो बनाया जा रहा है, वह भड़क उठता है और कैमरा बंद करने को कहने लगता है, साथ ही फोन पर किसी अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश करता है। पीड़ित औरंगाबाद के कर्मा गांव निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वह अपने बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र में त्रुटि सुधार कराने के लिए कई दिनों से सदर अस्पताल के चक्कर लगा रहा था। आरोप है कि उससे 300 रुपये की मांग की गई। पहले उसके पास नकद पैसे नहीं होने पर उसे वापस लौटा दिया गया। बाद में जब वह कैश लेकर पहुंचा और 200 रुपये देने लगा, तो कर्मी ने 300 रुपये से कम लेने से इनकार कर दिया। काउंटर पर मौजूद महिला बोली कई महीने से चक्कर लगा रही हूं, पैसे की डिमांड की जाती है सदर अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाने में हो रही देरी और कथित वसूली को लेकर एक महिला ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। गया से आई स्वीटी कुमारी ने बताया कि वह पिछले करीब 10 महीनों से अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लगातार अस्पताल का चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि उनका मायका औरंगाबाद में है, जबकि ससुराल गया में है और उनके बच्चे का जन्म औरंगाबाद सदर अस्पताल में ही हुआ था। इसी आधार पर वह यहीं से प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास कर रही हैं। महिला का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान उनसे भी पैसे की मांग की गई, लेकिन बावजूद इसके उनका काम नहीं हुआ। स्वीटी कुमारी ने बताया कि उन्होंने पहली बार जुलाई महीने में आवेदन दिया था, जिसे विभाग द्वारा निरस्त कर दिया गया। इसके बाद फरवरी में दोबारा आवेदन किया, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि प्रमाण पत्र बनना संभव नहीं है तो स्पष्ट बता देना चाहिए, लेकिन बार-बार चक्कर लगवाकर परेशान किया जा रहा है। पैसा देने के बावजूद भी नहीं मिला जन्म प्रमाणपत्र राजपुर गांव की निवासी हनी कुमारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए काउंटर पर बैठे एक कर्मी को 500 रुपये दिए, इसके बावजूद अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। हनी कुमारी ने बताया कि उनके बच्चे का जन्म दो महीने पहले सदर अस्पताल में हुआ था। इसके बाद से वह लगातार प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रही हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार कहने पर भी उनका काम नहीं हो रहा है और उन्हें टालमटोल किया जा रहा है। महिला का कहना है कि पैसे देने के बावजूद जब काम नहीं हो रहा, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस मामले ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले भी जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर वसूली करने का लगता रहा है आरोप सदर अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर वसूली का यह मामला नया नहीं है। इससे पहले भी यहां कार्यरत कर्मियों पर अवैध वसूली के आरोप लगते रहे हैं। आरोपों के सत्य पाए जाने पर पूर्व में सुशील कुमार को पद से हटाया जा चुका है। इसके बाद इस कार्य की जिम्मेदारी साहिल कुमार को दी गई थी, लेकिन उन्होंने भी यहां व्याप्त अनियमितताओं को देखते हुए तत्कालीन उपाधीक्षक को आवेदन देकर खुद को इस कार्य से अलग करने की मांग की थी। इसके बाद एक अन्य कर्मी को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन स्थिति में खास सुधार नहीं हो पाया। लोगों का आरोप है कि जानबूझकर आवेदन प्रक्रिया को लंबा खींचा जाता है, ताकि आवेदक परेशान होकर पैसे देने को मजबूर हो जाएं।गौरतलब है कि नियम के अनुसार सदर अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र मरीज को अस्पताल में ही उपलब्ध करा दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद लोगों को बार-बार चक्कर लगाना पड़ रहा है, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।  

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