भजनलाल सरकार ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस का उदाहरा पेश किया है। सरकार के मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में हुए 1450 करोड़ रुपये के ‘टांका निर्माण घोटाले’ की फाइलें फिर से खोलने का ऐलान किया है। इस मामले में 6 आईएएस अफसरों की भूमिका अब रडार पर है।
राजस्थान विधानसभा में अनुदान मांगों पर बहस के दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने भ्रष्टाचार के उन गड्ढों को उजागर किया है, जिन्हें कथित तौर पर पिछली सरकार ने ‘ठंडे बस्ते’ में डाल दिया था। मंत्री ने बाड़मेर में हुए 1537 करोड़ के टांका निर्माण कार्यों में भारी धांधली का दावा करते हुए कहा कि 750 करोड़ रुपये के काम तो मौके पर मिले ही नहीं।

कागजों में बने टांके, करोड़ों डकार गए अफसर !
मंत्री डॉ. मीणा ने सदन को बताया कि बाड़मेर जिले में टांका निर्माण के लिए 1537 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। जांच में सामने आया कि इनमें से लगभग आधे यानी 750 करोड़ रुपये के कार्य धरातल पर मौजूद ही नहीं हैं।
IAS अफसरों पर शिकंजा
इस घोटाले के समय बाड़मेर में तैनात रहे 6 जिला कलेक्टरों (IAS) को पिछली सरकार ने दबाव में ‘क्लीन चिट’ दे दी थी। भजनलाल सरकार अब इन अफसरों के खिलाफ नए सिरे से जांच शुरू करेगी।
खुद के मंत्रियों ने की थी शिकायत
डॉ. मीणा ने कहा कि इस घोटाले का खुलासा कांग्रेस सरकार के ही मंत्रियों ने किया था, लेकिन वोट बैंक और राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई को रोक दिया गया था।
करौली-दौसा में ‘खेल’: ACB करेगी जांच
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने केवल बाड़मेर ही नहीं, बल्कि करौली और दौसा जिलों में हुए भ्रष्टाचार के दो विशिष्ट मामलों को एसीबी (ACB) को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
- करौली (मंडरायल): यहां मनरेगा के तहत 28 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर केवल 2 करोड़ रुपये के ही काम हुए।
- दौसा (महवा): यहां 38 लाख रुपये के पुराने सीसीटीवी कैमरे खरीदे गए, जो एक दिन भी चालू नहीं हुए। कागजों में इन्हें नया दिखाकर भारी भुगतान उठाया गया।
‘भ्रष्टाचार प्रूफ’ बनेगी मनरेगा: मीणा
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप अब राजस्थान में मनरेगा को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा।
- 125 दिन का रोजगार: राजस्थान सरकार अब 100 की जगह 125 दिन का गारंटीशुदा रोजगार सुनिश्चित कर रही है।
- तकनीकी निगरानी: भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ‘वीबी-जी राम’ (VB-G RAM) जैसी आधुनिक प्रणालियों के माध्यम से योजनाओं की निगरानी की जाएगी, ताकि गरीबों के हक का पैसा बिचौलियों की जेब में न जाए।
‘ठंडे बस्ते’ से बाहर आएंगी फाइलें
सदन में मंत्री ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस राज में हुए भ्रष्टाचार के प्रकरण अपवाद नहीं बल्कि ‘सामान्य’ बन गए थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पिछली सरकार की तरह फाइलों को दबाएगी नहीं, बल्कि दोषियों को सलाखों के पीछे पहुँचाएगी। 6 आईएएस अफसरों के खिलाफ जांच शुरू होने की खबर से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।


