गया शहर के यातायात को आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के निर्देश पर बागेश्वरी रेलवे गुमटी क्रॉसिंग संख्या 71ए पर रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण काम तेज कर दिया गया है। इस परियोजना के लिए 9016.60 लाख रुपये (लगभग 90.16 करोड़ रुपये) की स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे शहर को भारी जाम से राहत मिलेगी। इस आरओबी के निर्माण को लेकर पहले गया परिषद में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इसमें गया सदर अनुमंडल पदाधिकारी, नगर पुलिस उपाधीक्षक और विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए थे। बैठक में शहर की प्रमुख समस्याओं और आरओबी निर्माण पर विस्तार से चर्चा हुई थी। अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया हाल ही में संबंधित अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया, जिसमें सदर अनुमंडल पदाधिकारी, नगर पुलिस उपाधीक्षक, पुल निर्माण निगम के अभियंता और विधानसभा अध्यक्ष के प्रतिनिधि मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान रूट डायवर्सन, निर्माण प्रक्रिया और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी की ओर से पहले ही रूट डायवर्सन को लेकर निर्देश जारी किए जा चुके हैं, जिसमें निर्माण काम शीघ्र शुरू करने के लिए आवश्यक योजना तैयार करने को कहा गया था। पुल निर्माण निगम के अभियंता के अनुसार, प्रस्तावित आरओबी की लंबाई 645.073 मीटर और चौड़ाई 7.50 मीटर (दो लेन) होगी। प्रशासन का कहना है कि रूट डायवर्सन का काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के शुरू हो सके। इस पुल के निर्माण से गया रेलवे स्टेशन से रामशिला और प्रेतशिला जाने वाले पर्यटकों, पिंडदान करने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को भारी जाम से बड़ी राहत मिलेगी। आवागमन सुगम होने से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। स्थानीय लोगों में परियोजना को लेकर उत्साह स्थानीय लोगों में इस परियोजना को लेकर काफी उत्साह है। उनका कहना है कि गया शहर में विष्णुपद कॉरिडोर, सड़कों का चौड़ीकरण और रेलवे स्टेशन के विस्तार जैसे कई विकास कार्य लगातार हो रहे हैं। इस आरओबी के निर्माण से शहर के विकास को और गति मिलेगी। धर्म और न्याय के लिए करें संघर्ष परशुराम जयंती के अवसर पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने शुभकामनाएं देते हुए भगवान परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम शक्ति, तप, त्याग और धर्म के अद्भुत प्रतीक हैं और उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। भगवान परशुराम का जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। वे जन्म से ब्राह्मण थे, लेकिन उनके कर्म एक महान योद्धा के समान थे। उनके हाथ में धारण किया गया परशु (कुल्हाड़ी) उनके पराक्रम और पहचान का प्रतीक है। डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि भगवान परशुराम ने अपने जीवन को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ समर्पित कर दिया था। उन्होंने अत्याचारी राजाओं का अंत कर समाज में न्याय की स्थापना की। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि जब भी समाज में अधर्म बढ़े, तो उसे समाप्त करने के लिए साहस और दृढ़ संकल्प जरूरी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भगवान परशुराम केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि एक श्रेष्ठ गुरु भी थे। उन्होंने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं को शिक्षा दी, जो उनके ज्ञान और तपस्या का प्रमाण है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। हमें सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए, अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए। अंत में उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे इस पावन अवसर पर यह संकल्प लें कि वे धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलेंगे और एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान देंगे। गया शहर के यातायात को आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के निर्देश पर बागेश्वरी रेलवे गुमटी क्रॉसिंग संख्या 71ए पर रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण काम तेज कर दिया गया है। इस परियोजना के लिए 9016.60 लाख रुपये (लगभग 90.16 करोड़ रुपये) की स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे शहर को भारी जाम से राहत मिलेगी। इस आरओबी के निर्माण को लेकर पहले गया परिषद में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इसमें गया सदर अनुमंडल पदाधिकारी, नगर पुलिस उपाधीक्षक और विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए थे। बैठक में शहर की प्रमुख समस्याओं और आरओबी निर्माण पर विस्तार से चर्चा हुई थी। अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया हाल ही में संबंधित अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया, जिसमें सदर अनुमंडल पदाधिकारी, नगर पुलिस उपाधीक्षक, पुल निर्माण निगम के अभियंता और विधानसभा अध्यक्ष के प्रतिनिधि मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान रूट डायवर्सन, निर्माण प्रक्रिया और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी की ओर से पहले ही रूट डायवर्सन को लेकर निर्देश जारी किए जा चुके हैं, जिसमें निर्माण काम शीघ्र शुरू करने के लिए आवश्यक योजना तैयार करने को कहा गया था। पुल निर्माण निगम के अभियंता के अनुसार, प्रस्तावित आरओबी की लंबाई 645.073 मीटर और चौड़ाई 7.50 मीटर (दो लेन) होगी। प्रशासन का कहना है कि रूट डायवर्सन का काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के शुरू हो सके। इस पुल के निर्माण से गया रेलवे स्टेशन से रामशिला और प्रेतशिला जाने वाले पर्यटकों, पिंडदान करने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को भारी जाम से बड़ी राहत मिलेगी। आवागमन सुगम होने से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। स्थानीय लोगों में परियोजना को लेकर उत्साह स्थानीय लोगों में इस परियोजना को लेकर काफी उत्साह है। उनका कहना है कि गया शहर में विष्णुपद कॉरिडोर, सड़कों का चौड़ीकरण और रेलवे स्टेशन के विस्तार जैसे कई विकास कार्य लगातार हो रहे हैं। इस आरओबी के निर्माण से शहर के विकास को और गति मिलेगी। धर्म और न्याय के लिए करें संघर्ष परशुराम जयंती के अवसर पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने शुभकामनाएं देते हुए भगवान परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम शक्ति, तप, त्याग और धर्म के अद्भुत प्रतीक हैं और उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। भगवान परशुराम का जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। वे जन्म से ब्राह्मण थे, लेकिन उनके कर्म एक महान योद्धा के समान थे। उनके हाथ में धारण किया गया परशु (कुल्हाड़ी) उनके पराक्रम और पहचान का प्रतीक है। डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि भगवान परशुराम ने अपने जीवन को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ समर्पित कर दिया था। उन्होंने अत्याचारी राजाओं का अंत कर समाज में न्याय की स्थापना की। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि जब भी समाज में अधर्म बढ़े, तो उसे समाप्त करने के लिए साहस और दृढ़ संकल्प जरूरी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भगवान परशुराम केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि एक श्रेष्ठ गुरु भी थे। उन्होंने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं को शिक्षा दी, जो उनके ज्ञान और तपस्या का प्रमाण है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। हमें सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए, अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए। अंत में उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे इस पावन अवसर पर यह संकल्प लें कि वे धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलेंगे और एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान देंगे।


