वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) को लेकर मची अफरातफरी के बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार (1 अक्टूबर) को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से सवाल किया कि वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन ‘फॉर्म 6’ में बदलाव करने की इजाज़त किसने दी और क्या इन बदलावों को लागू करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) पर दबाव डाला गया था।
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X पर एक पोस्ट में, गांधी ने पूछा कि क्या टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) पर ऐसा करने के लिए दबाव डाला गया था। गांधी ने कहा कि ऑनलाइन फ़ॉर्म 6 को गैर-कानूनी तरीके से बदला गया – जैसा कि EC के अपने कमिश्नरों ने दर्ज किया है। ECI में किसने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को वह बदलाव करने का आदेश दिया? उन्होंने X पर कहा कि TCS में किसने इसे मंज़ूरी दी? और क्या उन पर ऐसा करने के लिए दबाव डाला गया था?
राहुल गांधी का यह बयान तब आया जब चुनाव आयोग ने उन राज्यों में ऑनलाइन वोटर एनरोलमेंट फॉर्म 6 से SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त डिक्लेरेशन हटा दिया, जहां वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) पूरा हो चुका है। जिन राज्यों में SIR पूरा हो गया है, वहां ECINET ऐप और पोर्टल के साथ-साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी अतिरिक्त डिक्लेरेशन हटा दिया गया है। अब रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत तय कानूनी फॉर्म 6 ही भरना होगा।
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जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी चल रही है, वहां ECINET पोर्टल पर अतिरिक्त डिक्लेरेशन अभी भी उपलब्ध है। इस डिक्लेरेशन के तहत, नए आवेदकों को खुद को, अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पहले हुए SIR के दौरान तैयार वोटर लिस्ट से जोड़ने वाली जानकारी देनी होती है। यह बयान विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा सभी ज़िलों में संयुक्त “लोकतंत्र बचाओ” मार्च और पाँच बड़ी रैलियों की घोषणा के एक दिन बाद आया है। गठबंधन ने यह भी मांग की कि भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं और सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि SIR और कथित चुनावी गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में तेज़ी लाई जाए।

