Radiation Burns: कैंसर के इलाज के दौरान त्वचा पर लालपन और पपड़ी क्यों जमती है? क्लीवलैंड क्लिनिक से समझें रेडिएशन बर्न की वजह

Radiation Burns: कैंसर के इलाज के दौरान त्वचा पर लालपन और पपड़ी क्यों जमती है? क्लीवलैंड क्लिनिक से समझें रेडिएशन बर्न की वजह

Radiation Burns Hindi: कैंसर का इलाज जब शुरू होता है, तो मरीज को बीमारी के साथ-साथ उसके कई तरह के साइड इफेक्ट्स से भी जूझना पड़ता है। रेडिएशन थेरेपी (रेडियोथेरेपी) भी ऐसा ही एक इलाज है। इलाज के दौरान कई बार मरीज की त्वचा पर लालपन आने लगता है, खुजली होती है और धीरे-धीरे त्वचा सूखकर पपड़ी की तरह निकलने लगती है। डॉक्टरी भाषा में इसे ‘रेडिएशन बर्न’ या ‘रेडिएशन डर्मेटाइटिस’ कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, रेडिएशन लेने वाले लगभग 90 प्रतिशत से ज्यादा लोगों में यह समस्या देखने को मिलती है। आइए समझते हैं कि आखिर रेडिएशन बर्न क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

रेडिएशन बर्न क्या है और यह क्यों होता है?

अमेरिकन बर्न एसोसिएशन के मुताबिक, कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी के जरिए एक खास मशीन से हाई-एनर्जी किरणों को कैंसर कोशिकाओं (कैंसर सेल्स) पर डाला जाता है, ताकि उन्हें नष्ट किया जा सके। अब सवाल यह उठता है कि त्वचा क्यों झुलसती है? असल में ये किरणें जब शरीर के अंदर कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचती हैं, तो इन्हें आपकी त्वचा के ऊपर से होकर गुजरना पड़ता है। इस दौरान ये किरणें त्वचा की स्वस्थ कोशिकाओं (हेल्दी सेल्स) को भी थोड़ा नुकसान पहुंचा देती हैं। यही वजह है कि जिस जगह पर रेडिएशन दिया जाता है, वहाँ की त्वचा धूप में झुलसी (सनबर्न) हुई जैसी लाल या काली पड़ने लगती है और उस पर पपड़ी जमने लगती है।

रेडिएशन बर्न के शुरुआती और मुख्य लक्षण

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, रेडिएशन बर्न का असर हर इंसान पर अलग-अलग हो सकता है। यह तुरंत नहीं, बल्कि इलाज के 1 से 2 हफ्ते बाद दिखना शुरू होता है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं;

  • त्वचा के रंग में बदलाव।
  • सूखापन और खुजली।
  • छिलना और पपड़ी जमना।
  • सूजन और छाले।
  • त्वचा से पानी या मवाद आना।

किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा रहता है?

रेडिएशन बर्न किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह ज्यादा देखने को मिलता है;

  • ब्रेस्ट कैंसर, गले व सिर के कैंसर, या स्किन कैंसर के इलाज में इसका खतरा ज्यादा रहता है।
  • जो लोग बीड़ी, सिगरेट या तंबाकू का सेवन करते हैं।
  • अगर रेडिएशन के साथ-साथ कीमोथेरेपी भी चल रही हो।

त्वचा का ख्याल कैसे रखें और राहत कैसे पाएं?

रेडिएशन बर्न को पूरी तरह रोकना मुश्किल है, लेकिन कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आप अपनी तकलीफ को काफी हद तक कम कर सकते हैं। नहाते समय प्रभावित जगह को गुनगुने पानी और बिना खुशबू वाले हल्के साबुन से धोएं। लूफा, कपड़े या स्पंज से त्वचा को रगड़ें नहीं। नहाने के बाद तौलिये से त्वचा को रगड़ने के बजाय हल्के हाथ से थपथपाकर सुखाएं। अपनी मर्जी से कोई भी लोशन, पाउडर या क्रीम न लगाएं। केवल वही मॉइस्चराइजर या स्टेरॉयड क्रीम इस्तेमाल करें जो आपके डॉक्टर ने बताई हो। बहुत ज्यादा टाइट या सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें, ताकि त्वचा पर रगड़ न लगे। प्रभावित त्वचा को सीधे धूप के संपर्क में न आने दें। बाहर निकलते समय ढके रहें। प्रभावित जगह पर बहुत ज्यादा ठंड या गर्मी (जैसे हॉट वाटर बैग या आइस पैक) का इस्तेमाल न करें।

कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें?

आमतौर पर रेडिएशन थेरेपी खत्म होने के कुछ हफ्तों बाद त्वचा धीरे-धीरे अपने आप ठीक होने लगती है। लेकिन अगर आपको नीचे दी गई परेशानियाँ दिखें, तो तुरंत अपने डॉक्टर को बताएं;

  • 100.4°F (38.3°C) या उससे तेज बुखार होना।
  • प्रभावित जगह की त्वचा बहुत ज्यादा गर्म होना या बहुत तेज दर्द होना।
  • छालों में से बदबूदार पानी या मवाद बहना (जो इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है)।

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