मोतिहारी में ‘जन भागीदारी’ अभियान का शुभारंभ:’जनजातीय गरिमा उत्सव 2026′ का डीएम ने किया उद्घाटन, 25 मई को डिब्रीफिंग

मोतिहारी में ‘जन भागीदारी’ अभियान का शुभारंभ:’जनजातीय गरिमा उत्सव 2026′ का डीएम ने किया उद्घाटन, 25 मई को डिब्रीफिंग

मोतिहारी स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभा भवन में जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने ‘जनजातीय गरिमा उत्सव 2026’ के तहत ‘जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान का उद्घाटन किया। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य जनजातीय समुदायों तक सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करना और उनके समग्र विकास को गति देना है। सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा यह अभियान 19 मई से 25 मई 2026 तक जिले के जनजातीय बहुल गांवों और टोलों में चलाया जाएगा। इस दौरान विभिन्न शिविरों के माध्यम से अनुसूचित जनजाति के लोगों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से जोड़ा जाएगा। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी।उद्घाटन के अवसर पर जनजातीय समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया। समावेशी विकास और अधिकारों पर चर्चा कार्यक्रम में जनजातीय विरासत के संरक्षण, समावेशी विकास और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की और लाभार्थियों के साथ संवाद भी किया। जिला कल्याण पदाधिकारी संतोष कुमार पाण्डेय ने अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड की पश्चिमी सरोत्तर और बैरिया पंचायत, तथा कल्याणपुर प्रखंड की दरमाहा और सिसवा पटना (हाजीपुर) पंचायतों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में 19, 21 और 22 मई को हकदारी अभियान के तहत संतृप्ति शिविर, मेडिकल कैंप और वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित होंगे। 20 मई को प्रखंड और पंचायत स्तर के पदाधिकारी गांव-टोलों का भ्रमण कर लोगों को जागरूक करेंगे। 23 मई को जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित इसके अतिरिक्त, 23 मई को जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें लोगों की समस्याएं सुनी जाएंगी। 24 मई को अभियान की उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण होगा और 25 मई को जिलाधिकारी द्वारा डिब्रीफिंग कर पूरे कार्यक्रम की समीक्षा की जाएगी। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के जिलास्तरीय, प्रखंड स्तरीय और पंचायत स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। अभियान का मुख्य लक्ष्य जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा से जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। मोतिहारी स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभा भवन में जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने ‘जनजातीय गरिमा उत्सव 2026’ के तहत ‘जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान का उद्घाटन किया। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य जनजातीय समुदायों तक सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करना और उनके समग्र विकास को गति देना है। सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा यह अभियान 19 मई से 25 मई 2026 तक जिले के जनजातीय बहुल गांवों और टोलों में चलाया जाएगा। इस दौरान विभिन्न शिविरों के माध्यम से अनुसूचित जनजाति के लोगों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से जोड़ा जाएगा। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी।उद्घाटन के अवसर पर जनजातीय समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया। समावेशी विकास और अधिकारों पर चर्चा कार्यक्रम में जनजातीय विरासत के संरक्षण, समावेशी विकास और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की और लाभार्थियों के साथ संवाद भी किया। जिला कल्याण पदाधिकारी संतोष कुमार पाण्डेय ने अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड की पश्चिमी सरोत्तर और बैरिया पंचायत, तथा कल्याणपुर प्रखंड की दरमाहा और सिसवा पटना (हाजीपुर) पंचायतों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में 19, 21 और 22 मई को हकदारी अभियान के तहत संतृप्ति शिविर, मेडिकल कैंप और वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित होंगे। 20 मई को प्रखंड और पंचायत स्तर के पदाधिकारी गांव-टोलों का भ्रमण कर लोगों को जागरूक करेंगे। 23 मई को जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित इसके अतिरिक्त, 23 मई को जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें लोगों की समस्याएं सुनी जाएंगी। 24 मई को अभियान की उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण होगा और 25 मई को जिलाधिकारी द्वारा डिब्रीफिंग कर पूरे कार्यक्रम की समीक्षा की जाएगी। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के जिलास्तरीय, प्रखंड स्तरीय और पंचायत स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। अभियान का मुख्य लक्ष्य जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा से जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है।  

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