सुपौल जिले में संभावित बाढ़ 2026 को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को समाहरणालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में जल संसाधन विभाग द्वारा किए जा रहे कटाव निरोधी कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न तटबंध प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की प्रगति से जिलाधिकारी को अवगत कराया। कटाव रोकने के लिए कार्य जारी बैठक में कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल वीरपुर, पूर्वी तटबंध प्रमंडल वीरपुर-02, पूर्वी तटबंध प्रमंडल सुपौल, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल निर्मली तथा शीर्ष कार्य प्रमंडल वीरपुर के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि जिले के विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर कटाव रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी है। जानकारी के अनुसार, पूर्वी तटबंध प्रमंडल वीरपुर द्वारा 15 स्थलों पर कटाव निरोधी कार्य किए जा रहे हैं, जबकि पूर्वी तटबंध प्रमंडल वीरपुर-02 के तहत 10 स्थलों पर कार्य प्रगति पर है। बाढ़ के दौरान क्षति कम करना उद्देश्य इसी तरह पूर्वी तटबंध प्रमंडल सुपौल द्वारा 5 स्थानों पर तथा शीर्ष कार्य प्रमंडल वीरपुर द्वारा 20 स्थानों पर कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है। इन कार्यों का उद्देश्य बाढ़ के दौरान संभावित क्षति को कम करना और तटबंधों को मजबूत बनाना है। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी सावन कुमार ने कार्यों की प्रगति का गहन निरीक्षण किया। इस क्रम में कुछ स्थलों पर कटाव निरोधी कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई, जिस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। जिलाधिकारी ने संबंधित कार्यपालक अभियंताओं को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी कार्यों को हर हाल में पूरा किया जाए। गुणवत्ता से नहीं किया जाएगा समझौता उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि कार्यों की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए और नियमित रूप से स्थल निरीक्षण कर प्रगति की निगरानी सुनिश्चित की जाए। साथ ही संभावित बाढ़ को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी करने पर जोर दिया गया। डीएम ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण सुपौल में पूर्व तैयारी बेहद जरूरी है। कटाव निरोधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहते हुए समन्वय के साथ कार्य करने की हिदायत दी। बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे कार्यों की अद्यतन रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध कराएं, ताकि समय-समय पर समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकें। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि संभावित बाढ़ से पहले सभी संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षा उपाय पूरी तरह सुनिश्चित कर लिए जाएं, जिससे जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके। सुपौल जिले में संभावित बाढ़ 2026 को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को समाहरणालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में जल संसाधन विभाग द्वारा किए जा रहे कटाव निरोधी कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न तटबंध प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की प्रगति से जिलाधिकारी को अवगत कराया। कटाव रोकने के लिए कार्य जारी बैठक में कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल वीरपुर, पूर्वी तटबंध प्रमंडल वीरपुर-02, पूर्वी तटबंध प्रमंडल सुपौल, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल निर्मली तथा शीर्ष कार्य प्रमंडल वीरपुर के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि जिले के विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर कटाव रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी है। जानकारी के अनुसार, पूर्वी तटबंध प्रमंडल वीरपुर द्वारा 15 स्थलों पर कटाव निरोधी कार्य किए जा रहे हैं, जबकि पूर्वी तटबंध प्रमंडल वीरपुर-02 के तहत 10 स्थलों पर कार्य प्रगति पर है। बाढ़ के दौरान क्षति कम करना उद्देश्य इसी तरह पूर्वी तटबंध प्रमंडल सुपौल द्वारा 5 स्थानों पर तथा शीर्ष कार्य प्रमंडल वीरपुर द्वारा 20 स्थानों पर कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है। इन कार्यों का उद्देश्य बाढ़ के दौरान संभावित क्षति को कम करना और तटबंधों को मजबूत बनाना है। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी सावन कुमार ने कार्यों की प्रगति का गहन निरीक्षण किया। इस क्रम में कुछ स्थलों पर कटाव निरोधी कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई, जिस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। जिलाधिकारी ने संबंधित कार्यपालक अभियंताओं को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी कार्यों को हर हाल में पूरा किया जाए। गुणवत्ता से नहीं किया जाएगा समझौता उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि कार्यों की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए और नियमित रूप से स्थल निरीक्षण कर प्रगति की निगरानी सुनिश्चित की जाए। साथ ही संभावित बाढ़ को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी करने पर जोर दिया गया। डीएम ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण सुपौल में पूर्व तैयारी बेहद जरूरी है। कटाव निरोधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहते हुए समन्वय के साथ कार्य करने की हिदायत दी। बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे कार्यों की अद्यतन रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध कराएं, ताकि समय-समय पर समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकें। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि संभावित बाढ़ से पहले सभी संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षा उपाय पूरी तरह सुनिश्चित कर लिए जाएं, जिससे जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।


