मथुरा में होली पर्व की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली के प्रमुख चौराहों पर होलिकाएं स्थापित कर उन्हें सजाया गया है। प्रशासन और स्थानीय समितियों ने सभी आयोजनों को अंतिम रूप दे दिया है। ऐतिहासिक होली गेट क्षेत्र को होलिका दहन का मुख्य केंद्र माना जाता है। यहां शहर की विभिन्न होलिकाएं एकत्र होकर सामूहिक दहन के लिए लाई जाती हैं। यह परंपरा भाईचारे और और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
होली गेट पर होलिका दहन के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी एकत्र होते हैं। वे बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्त प्रह्लाद की विजय का स्मरण करते हैं। होली गेट के अंदर स्थित होली वाली गली में होलिका धुलेंडी से दो दिन पूर्व स्थापित की जाती है। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। स्थानीय पुरोहितों के अनुसार, लगभग 100 वर्ष पहले यहां लकड़ी की होलिका जलाई जाती थी। हालांकि, कुछ वर्षों से अब प्रतिमा जलाई जा रही है।
इस वर्ष ग्रहण और भद्रा काल के कारण होली वाली गली में होलिका दहन प्रातः 5:30 बजे किये जाने की बात सामने आई हैं। ब्रजवासी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस पर्व की तैयारियों में लगे हुए हैं। सुरक्षा को लेकर शहर में जगह-जगह पुलिस तैनात की गई है मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने कहा कि होली त्यौहार के अवसर पर किसी प्रकार का कोई भी हुड़दंग और उपद्रव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विवादित स्थानों पर होलिका दहन पुलिस की निगरानी में कराया जाएगा।


