उत्तर प्रदेश के बरेली में मुस्कान खान ने ‘घर वापसी’ कर हिंदू धर्म अपना लिया है। उन्होंने आकाश नाम के युवक के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया। पंडित के.के. शंखधार ने सबसे पहले मुस्कान का शुद्धिकरण कराया। उन्हें गंगाजल और गौ-मूत्र पिलाकर तथा गायत्री मंत्र का जाप कराकर विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया गया। मुस्कान पिछले 5 वर्षों से भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लीन हैं। उन्हें हिंदू धर्म की परंपराएं पसंद हैं, यही वजह है कि उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म को चुना। रामपुर से बरेली तक का सफर और आश्रम में शादी
1 जनवरी 2006 को जिला रामपुर के ग्राम थनापुर (नरखेड़ा स्वार) में जन्मी मुस्कान खान अब मुस्कान यादव बन गई हैं। उन्होंने 26 वर्षीय आकाश के साथ सात फेरे लिए हैं। आकाश भी रामपुर जिले के ग्राम पसियापुरा जनूबी का रहने वाला है। दोनों ने घर से निकलकर विवाह करने का निर्णय लिया। मुस्कान ने आकाश को फोन कर बताया था कि वह उनसे शादी करना चाहती हैं, लेकिन अलग-अलग धर्म होने के कारण उनके परिवार वाले राजी नहीं थे। इस पर मुस्कान के प्रस्ताव को मानते हुए आकाश ने शादी का निर्णय लिया। दोनों रामपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़कर बरेली पहुंचे और सुभाषनगर थाना क्षेत्र स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में पंडित के.के. शंखधार के सानिध्य में विवाह किया। पहली मुलाकात से प्रपोजल तक की प्रेम कहानी
मुस्कान ने बताया कि एक साल पहले आकाश उनके गांव आए थे, जहां उनकी पहली मुलाकात हुई। आकाश को देखते ही मुस्कान को लगा कि वह उनके जीवनसाथी बन सकते हैं। उन्होंने आकाश से उनका नंबर लिया और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। धीरे-धीरे मिलना-जुलना बढ़ा और फिर मुस्कान ने ही पहले आकाश को ‘आई लव यू’ बोलकर शादी का प्रस्ताव रखा। इसके बाद आकाश उन्हें अपने घर ले गए और परिजनों से मिलवाया। आकाश के परिवार वाले इस रिश्ते के लिए तैयार हो गए, लेकिन जब मुस्कान के घर वालों को पता चला तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। विरोध को देखते हुए दोनों ने भागकर शादी करने का फैसला किया। सनातन धर्म की परंपराओं और सम्मान से प्रभावित मुस्कान
आकाश एक प्राइवेट नौकरी करते हैं, जबकि मुस्कान के परिवार में उनके माता-पिता और नौ बहनें हैं। मुस्कान का कहना है कि उन्हें सनातन धर्म बहुत अच्छा लगता है क्योंकि यहाँ महिलाओं को उचित सम्मान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यहाँ तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाएं नहीं हैं। इसके साथ ही मुस्कान ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म में हिजाब और बुर्के की पाबंदी नहीं है, जिससे उन्हें स्वतंत्रता का अनुभव होता है।


