ईरान और अमेरिका के बीच संघर्षविराम के बाद भी गैस सिलेंडरों का संकट, प्रशासन के सामने भी चुनौती

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्षविराम के बाद भी गैस सिलेंडरों का संकट, प्रशासन के सामने भी चुनौती

Lpg Gas Crisis: ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के बाद भले ही सीजफायर हो गया हो, लेकिन इसका असर अब ग्रामीण इलाकों के शादी समारोहों पर साफ नजर आ रहा है। बस्सी, चाकसू और जमवारामगढ़ उपखंड क्षेत्रों में अप्रेल-मई के शादी सीजन के बीच एलपीजी गैस सिलेंडरों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

अनुमान है कि इन क्षेत्रों में करीब 6 से 7 हजार शादियां होने वाली हैं, जिससे सिलेंडरों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है। एक शादी में औसतन 15 से 20 सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, जबकि अधिकांश परिवारों के पास इतनी व्यवस्था नहीं हो पा रही।

सरकार द्वारा राहत के लिए शहरी क्षेत्र में 3 और ग्रामीण क्षेत्र में 2 कमर्शियल सिलेंडर देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन यह जरूरत के मुकाबले बेहद कम साबित हो रहा है।

सिलेंडर प्राप्त करने की प्रक्रिया भी जटिल है। शादी कार्ड लेकर जयपुर स्थित रसद अधिकारी के पास आवेदन, स्वीकृति के बाद गैस एजेंसी और फिर गोदाम से सिलेंडर लेने तक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। दूरदराज गांवों के लोगों को 100 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ रहा है।

एजेंसियों में भी स्टॉक की कमी

स्थिति यह है कि कई गैस एजेंसियों के पास खुद कमर्शियल सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। वहीं उपभोक्ताओं से खाली सिलेंडर लाने की शर्त रखी जा रही है, जो अधिकांश के लिए संभव नहीं है। इससे परेशानी और बढ़ रही है।

लकड़ी भी हुई महंगी, विकल्प भी सीमित

गैस की कमी के चलते लोग लकड़ी की भट्टियों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन यहां भी राहत नहीं मिल रही। पहले 500 रुपए प्रति क्विंटल मिलने वाली लकड़ी अब 800 रुपए तक पहुंच गई है और ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी उपलब्धता भी कम हो गई है।

पड़ोसी और रिश्तेदार भी पीछे हटे

गैस संकट का असर सामाजिक व्यवहार पर भी पड़ा है। पहले जहां पड़ोसी आसानी से सिलेंडर दे देते थे, अब लोग बहाने बनाकर बच रहे हैं। मजबूरी में लोग रिश्तेदारों के यहां सिलेंडर या डायरी की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन वहां भी लंबी प्रक्रिया और कतारों से गुजरना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की जुबानी: बढ़ता खर्च और चिंता

  • हिम्मतपुरा निवासी कमल मीणा का कहना है कि सिलेंडर नहीं मिलने से बाजार से महंगी मिठाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
  • देवगांव के पवन मीणा के अनुसार लकड़ी के बढ़ते दामों ने शादी का बजट बिगाड़ दिया है।
  • साईवाड़ निवासी चंदा लाल, जिनके यहां 21 अप्रेल को शादी है, बताते हैं कि सिलेंडर की व्यवस्था न होने से तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।

गंभीर रूप ले सकती है समस्या

गैस संकट ने जहां शादी वाले घरों की खुशियों को फीका कर दिया है, वहीं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सीमाएं भी उजागर कर दी हैं। यदि जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

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