Prateek Yadav Last Rites: पापा क्यों चले गए… अंतिम विदाई में रो पड़ीं अपर्णा और बेटियां

Prateek Yadav Last Rites: पापा क्यों चले गए… अंतिम विदाई में रो पड़ीं अपर्णा और बेटियां

Prateek Yadav Heart breaking Farewell:  समाजवादी पार्टी संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुत्र और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की अंतिम विदाई का दृश्य गुरुवार को हर किसी की आंखें नम कर गया। लखनऊ स्थित आवास पर जब प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, तब वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। सबसे मार्मिक पल वह था जब पत्नी अपर्णा यादव अपने पति को अंतिम विदाई देते हुए खुद को संभाल नहीं सकीं और फूट-फूटकर रोने लगीं।


Prateek Yadav Heart breaking Farewell

उनके साथ खड़ी दोनों बेटियां भी पिता के पार्थिव शरीर को देख लगातार बिलखती रहीं। छोटी बेटी बार-बार अपने पिता के चेहरे को एकटक निहारती रही, मानो उसे अभी भी विश्वास न हो रहा हो कि उसके पापा अब इस दुनिया में नहीं रहे।वह कभी अपनी मां अपर्णा यादव से लिपटकर रो पड़ती, तो कभी चुपचाप पिता को देखती रहती। उसकी मासूम आंखों में जैसे एक ही सवाल था- “पापा क्यों चले गए?” वहीं बड़ी बेटी पूरे समय खुद को संभालते हुए मां और छोटी बहन को ढांढस बंधाती नजर आई। हालांकि उसकी आंखों से भी लगातार आंसू बह रहे थे।

हर आंख हुई नम

प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर के पास मौजूद हर व्यक्ति भावुक दिखाई दिया।परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, करीबी मित्र और राजनीतिक हस्तियां लगातार पहुंच रही थीं और श्रद्धांजलि अर्पित कर रही थीं। घर के बाहर हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे। हर कोई अपने प्रिय नेता और शांत स्वभाव वाले प्रतीक यादव को अंतिम विदाई देने पहुंचा था। महिलाएं रो रही थीं, बुजुर्ग गम में डूबे थे और युवा समर्थकों की आंखों में भी आंसू साफ दिखाई दे रहे थे।

अपर्णा यादव का रो-रोकर बुरा हाल

पति की अचानक मौत से अपर्णा यादव पूरी तरह टूट चुकी नजर आईं।जब अंतिम यात्रा की तैयारी शुरू हुई तो वह कई बार भावुक होकर रो पड़ीं। करीबी महिलाएं और परिवार के सदस्य उन्हें संभालते रहे, लेकिन पति को अंतिम बार देखकर वह अपने आंसू नहीं रोक सकीं।अपर्णा यादव लगातार प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर के पास बैठी रहीं। उनके चेहरे पर गहरा दर्द और सदमा साफ दिखाई दे रहा था।

छोटी बेटी का मासूम इंतजार

अंतिम विदाई के दौरान सबसे ज्यादा भावुक कर देने वाला दृश्य छोटी बेटी का था।वह अपने पिता के चेहरे को लगातार देखती रही।ऐसा लग रहा था मानो उसे अभी भी उम्मीद हो कि उसके पापा अचानक उठ जाएंगे और उसे अपने गले लगा लेंगे। कभी वह मां के साथ सिसक-सिसक कर रोती, तो कभी चुपचाप खड़ी रह जाती। वह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर गया।

बड़ी बेटी ने संभाला परिवार

जहां एक ओर छोटी बेटी पूरी तरह टूट चुकी थी, वहीं बड़ी बेटी ने कठिन समय में खुद को संभालने की कोशिश की। वह लगातार अपनी मां और छोटी बहन को संभालती दिखाई दी। हालांकि उसकी आंखें भी लगातार नम थीं, लेकिन उसने परिवार को मजबूत बनाए रखने की कोशिश की। उसकी परिपक्वता और साहस को देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।


Prateek Yadav Heart breaking Farewell

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

प्रतीक यादव का पार्थिव शरीर जैसे ही अंतिम यात्रा के लिए आवास से बाहर लाया गया, वहां मौजूद हजारों लोग भावुक हो उठे। “प्रतीक यादव अमर रहें” के नारों के बीच अंतिम यात्रा भैंसा कुंड के लिए रवाना हुई। युवाओं, बुजुर्गों और समर्थकों की भारी भीड़ अंतिम यात्रा में शामिल हुई। पूरा माहौल गमगीन था और हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और आंसुओं का दर्द दिखाई दे रहा था।

नेताओं और समर्थकों ने दी श्रद्धांजलि

अंतिम यात्रा में कई बड़े राजनीतिक नेता और सामाजिक हस्तियां भी शामिल हुईं। समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों दलों के नेताओं ने परिवार को सांत्वना दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह और शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव ने भी प्रतीक यादव की अर्थी को कंधा देकर श्रद्धांजलि दी। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों के नेता इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े दिखाई दिए।

38 साल की उम्र में थम गई जिंदगी

38 वर्षीय प्रतीक यादव का अचानक निधन पूरे प्रदेश के लिए बड़ा सदमा बन गया है। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह वह अपने घर में अचेत अवस्था में मिले थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में Pulmonary Embolism यानी फेफड़ों में खून का थक्का बनने की बात सामने आई है। हालांकि मामले को लेकर कई सवाल अब भी चर्चा में हैं।

भैंसा कुंड में होगी अंतिम विदाई

प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार लखनऊ के भैंसा कुंड स्थित बैकुंठ धाम में पूरे विधि-विधान के साथ किया जाएगा। हजारों की भीड़ के बीच जब उनकी अंतिम यात्रा आगे बढ़ रही थी, तब हर आंख नम और हर चेहरा उदास दिखाई दे रहा था। किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी कम उम्र में प्रतीक यादव इस तरह अपने परिवार, पत्नी और मासूम बेटियों को अकेला छोड़कर चले जाएंगे। गुरुवार का यह दृश्य सिर्फ एक अंतिम यात्रा नहीं, बल्कि एक टूटते हुए परिवार के दर्द और बिछड़ने की ऐसी कहानी बन गया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।

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