प्रगति यात्रा . उद्घाटन हुए, लेकिन योजनाओं का लाभ नहीं:अधूरा मिनी स्टेडियम…चरौन गांव में दुर्गा मंदिर के पास किया जाना था विकसित

प्रगति यात्रा . उद्घाटन हुए, लेकिन योजनाओं का लाभ नहीं:अधूरा मिनी स्टेडियम…चरौन गांव में दुर्गा मंदिर के पास किया जाना था विकसित

भास्कर न्यूज| मुंगेर वर्ष 2025 में नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के समय जिन विकास योजनाओं का बड़े स्तर पर उद्घाटन और शिलान्यास किया गया था, उनकी वर्तमान स्थिति दयनीय है। मुख्यमंत्री ने 5 फरवरी(2025) को जिले के तारापुर, ऋषिकुंड, नौवागढ़ी मैदान और सदर प्रखंड के चरौन गांव का दौरा कर करीब 438 करोड़ रुपये की 160 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। अब एक बार फिर समृद्धि यात्रा के तहत आज मुंगेर में मुख्यमंत्री का आगमन हो रहा है। जिसमें लगभग 118 करोड़ रुपये की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास प्रस्तावित है। लेकिन पिछली योजनाओं की जमीनी हकीकत पर जब पड़ताल की गई, तो कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। हालांकि जमीनी स्थिति यह बताती है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजनाओं का लाभ न तो खिलाड़ियों को मिल पा रहा है और न ही ग्रामीणों को। ऐसे में विकास योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नौवागढ़ी में मनरेगा के तहत 44 लाख रुपये की लागत से तैयार खेल मैदान का उद्घाटन बड़े उत्साह के साथ किया गया था। इसमें फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी, खो-खो और रनिंग ट्रैक जैसी सुविधाएं विकसित की गई थीं। साथ ही चहारदीवारी, समतलीकरण, खिलाड़ियों के लिए चेंजिंग रूम, बैठने की व्यवस्था, प्याऊ और सोलर लाइट भी लगाई गई थी। लेकिन उद्घाटन के महज एक सप्ताह बाद ही यहां से सोलर प्लेट और लाइट चोरी हो गई। बास्केटबॉल पोल गायब हो गया, बैडमिंटन कोर्ट टूट गया और मैदान में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा दिखने लगा। बैठने की सीटें टूटी हुई हैं, प्याऊ की टोटी गायब है और अन्य खेल सुविधाएं पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। हालत यह है कि अब खिलाड़ी और धावक इस मैदान से दूरी बना चुके हैं। डीडीसी ने कहा, मैदान हैंडओवर हो चुका है डीडीसी अजीत कुमार सिंह का कहना है कि नौवागढ़ी मैदान को विद्यालय को हैंडओवर कर दिया गया है और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित संस्था की है। साथ ही उन्होंने बताया कि चरौन गांव में भी खिलाड़ियों के लिए नया मैदान तैयार किया जा रहा है। सदर प्रखंड के चरौन गांव में पंचायत सरकार भवन का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। लेकिन एक साल बाद भी यह भवन आज तक चालू नहीं हो सका है। उद्घाटन के बाद से ही भवन में ताला लटका हुआ है। यहां पर बड़े बड़े जंगल झाड़ उग गए हैं। यहां पर एक प्याऊ का निर्माण किया गया था, वह भी बंद पड़ा हुआ है। ग्रामीणों को पानी पीने में परेशानी हो रही है। यहीं नहीं, ग्रामीण युवाओं के लिए सेल्फ स्टडी हेतु बनाए गए पुस्तकालय की स्थिति भी खराब हो चुकी है। उद्घाटन के समय यहां डेस्क-बेंच, बिजली, पंखे और इंटरनेट की सुविधा दी गई थी। लेकिन मुख्यमंत्री के जाने के तुरंत बाद ही इंटरनेट उपकरण हटा लिए गए। अब पुस्तकालय की सीढ़ियां जर्जर हो चुकी हैं और बिजली-पंखे भी ग्रामीणों को अपने खर्च पर लगाने पड़ रहे हैं। चरौन गांव में दुर्गा मंदिर के पास जिस मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित किया जाना था, वह आज भी अधूरा पड़ा है। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। जिससे स्थानीय युवाओं को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल रही है। इन योजनाओं की बदहाल स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि उद्घाटन के समय केवल दिखावे के लिए व्यवस्था की गई थी। लेकिन बाद में उनकी देखरेख और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। भास्कर न्यूज| मुंगेर वर्ष 2025 में नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के समय जिन विकास योजनाओं का बड़े स्तर पर उद्घाटन और शिलान्यास किया गया था, उनकी वर्तमान स्थिति दयनीय है। मुख्यमंत्री ने 5 फरवरी(2025) को जिले के तारापुर, ऋषिकुंड, नौवागढ़ी मैदान और सदर प्रखंड के चरौन गांव का दौरा कर करीब 438 करोड़ रुपये की 160 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। अब एक बार फिर समृद्धि यात्रा के तहत आज मुंगेर में मुख्यमंत्री का आगमन हो रहा है। जिसमें लगभग 118 करोड़ रुपये की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास प्रस्तावित है। लेकिन पिछली योजनाओं की जमीनी हकीकत पर जब पड़ताल की गई, तो कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। हालांकि जमीनी स्थिति यह बताती है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजनाओं का लाभ न तो खिलाड़ियों को मिल पा रहा है और न ही ग्रामीणों को। ऐसे में विकास योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नौवागढ़ी में मनरेगा के तहत 44 लाख रुपये की लागत से तैयार खेल मैदान का उद्घाटन बड़े उत्साह के साथ किया गया था। इसमें फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी, खो-खो और रनिंग ट्रैक जैसी सुविधाएं विकसित की गई थीं। साथ ही चहारदीवारी, समतलीकरण, खिलाड़ियों के लिए चेंजिंग रूम, बैठने की व्यवस्था, प्याऊ और सोलर लाइट भी लगाई गई थी। लेकिन उद्घाटन के महज एक सप्ताह बाद ही यहां से सोलर प्लेट और लाइट चोरी हो गई। बास्केटबॉल पोल गायब हो गया, बैडमिंटन कोर्ट टूट गया और मैदान में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा दिखने लगा। बैठने की सीटें टूटी हुई हैं, प्याऊ की टोटी गायब है और अन्य खेल सुविधाएं पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। हालत यह है कि अब खिलाड़ी और धावक इस मैदान से दूरी बना चुके हैं। डीडीसी ने कहा, मैदान हैंडओवर हो चुका है डीडीसी अजीत कुमार सिंह का कहना है कि नौवागढ़ी मैदान को विद्यालय को हैंडओवर कर दिया गया है और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित संस्था की है। साथ ही उन्होंने बताया कि चरौन गांव में भी खिलाड़ियों के लिए नया मैदान तैयार किया जा रहा है। सदर प्रखंड के चरौन गांव में पंचायत सरकार भवन का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। लेकिन एक साल बाद भी यह भवन आज तक चालू नहीं हो सका है। उद्घाटन के बाद से ही भवन में ताला लटका हुआ है। यहां पर बड़े बड़े जंगल झाड़ उग गए हैं। यहां पर एक प्याऊ का निर्माण किया गया था, वह भी बंद पड़ा हुआ है। ग्रामीणों को पानी पीने में परेशानी हो रही है। यहीं नहीं, ग्रामीण युवाओं के लिए सेल्फ स्टडी हेतु बनाए गए पुस्तकालय की स्थिति भी खराब हो चुकी है। उद्घाटन के समय यहां डेस्क-बेंच, बिजली, पंखे और इंटरनेट की सुविधा दी गई थी। लेकिन मुख्यमंत्री के जाने के तुरंत बाद ही इंटरनेट उपकरण हटा लिए गए। अब पुस्तकालय की सीढ़ियां जर्जर हो चुकी हैं और बिजली-पंखे भी ग्रामीणों को अपने खर्च पर लगाने पड़ रहे हैं। चरौन गांव में दुर्गा मंदिर के पास जिस मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित किया जाना था, वह आज भी अधूरा पड़ा है। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। जिससे स्थानीय युवाओं को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल रही है। इन योजनाओं की बदहाल स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि उद्घाटन के समय केवल दिखावे के लिए व्यवस्था की गई थी। लेकिन बाद में उनकी देखरेख और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया।  

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