Prabhasakshi NewsRoom: Modi-Jinping की मुलाकात के बीच China ने LAC से घटाई सेना, मगर India ने बढ़ाई चौकसी!

Prabhasakshi NewsRoom: Modi-Jinping की मुलाकात के बीच China ने LAC से घटाई सेना, मगर India ने बढ़ाई चौकसी!
BRICS Summit में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भागीदारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 50 मिनट से अधिक चली अहम द्विपक्षीय बातचीत के बीच भारत-चीन सीमा से एक बड़ी खबर सामने आई है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 2025 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के उत्तरी हिस्सों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की तैनाती में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि इस घटनाक्रम को किसी भी तरह की रणनीतिक ढिलाई का संकेत मानने की गलती भारत नहीं कर रहा है। LAC के सभी सेक्टरों में भारतीय सेना की तैनाती अब भी मजबूत, संतुलित और हर संभावित चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार LAC और चीन के पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में अब भी कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड स्तर की करीब 10 चीनी सैन्य टुकड़ियां मौजूद हैं। यानी बीजिंग ने सेना पीछे जरूर की है, लेकिन सीमा पर उसकी सैन्य क्षमता खत्म नहीं हुई है। यही वह बिंदु है, जहां भारत की रणनीति सबसे ज्यादा मायने रखती है। चीन की तैनाती घटने को राहत के संकेत के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे खतरे के अंत के रूप में नहीं माना जा सकता।

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दिलचस्प बात यह है कि चीनी सैनिकों की तैनाती में यह कमी केवल सैन्य स्तर पर नहीं आई। इसके समानांतर भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य संवाद भी लगातार बढ़ा। 2025 में दोनों देशों के बीच Working Mechanism for Consultation and Coordination (WMCC) की 33वीं और 34वीं बैठक मार्च और जुलाई में हुई। सीमा विवाद पर दोनों देशों के Special Representatives के बीच बातचीत भी फिर शुरू हुई। देखा जाये तो दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में हुई इन वार्ताओं ने सीमा विवाद को केवल सैन्य कमांडरों के स्तर तक सीमित रहने से रोका और राजनीतिक संवाद की एक समानांतर पटरी तैयार की।
इस प्रक्रिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा ने भी नई गति दी। अगस्त 2025 में तियानजिन में आयोजित Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit के दौरान मोदी की चीन यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। इसके बाद भी सैन्य संवाद जारी रहा और अक्टूबर 2025 में पूर्वी लद्दाख में 23वीं Corps Commander Level Meeting हुई। सीमा के विभिन्न सेक्टरों में Border Personnel Meetings भी अपेक्षाकृत सौहार्दपूर्ण माहौल में जारी रहीं।
लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह केवल तनाव कम होने की कहानी है? देखा जाये तो जवाब इतना सीधा नहीं है। LAC पर चीन की सैन्य मौजूदगी में कमी निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत के लिए इसका रणनीतिक अर्थ सतर्कता कम करना नहीं, बल्कि अपनी बढ़त को बनाए रखते हुए कूटनीतिक स्पेस बढ़ाना है। गलवान के बाद भारत ने जिस तरह सीमा पर सैन्य ढांचा, सैनिक तैनाती और निगरानी क्षमता मजबूत की, उसका एक बड़ा संदेश यह है कि अब बीजिंग के साथ बातचीत कमजोर स्थिति से नहीं, बल्कि पर्याप्त सैन्य तैयारी के साथ की जा रही है।
इसी रणनीतिक पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया 50 मिनट से अधिक लंबी द्विपक्षीय बैठक बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। BRICS Summit के दौरान हुई इस मुलाकात में मोदी ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा का अवसर होने की बात कही। वहीं शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों को “रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण” से देखने की बात कही और साझा विकास के लिए दोनों देशों के साथ काम करने पर जोर दिया। देखा जाये तो चीन और भारत दोनों दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं और Global South में प्रभावशाली शक्तियां हैं। बदलते वैश्विक समीकरणों, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकटों के बीच बीजिंग भी यह समझता है कि नई दिल्ली को लगातार टकराव की स्थिति में रखना उसके दीर्घकालिक हित में नहीं है।
भारत के लिए भी रणनीतिक गणित स्पष्ट है। सीमा पर शांति का अर्थ चीन पर भरोसा करना नहीं, बल्कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और सहयोग, दोनों को अपनी शर्तों पर संभालना है। LAC पर सेना की मजबूत तैनाती और दूसरी तरफ राजनीतिक संवाद का विस्तार इसी दोहरी रणनीति का संकेत है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सीमा पर तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, लेकिन भारत अपनी सुरक्षा की कीमत पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। चीन अगर सैनिक घटाता है तो यह स्वागत योग्य है, मगर भारत अपनी सैन्य तैयारी बरकरार रखेगा। यानी नई दिल्ली की रणनीति साफ है। बातचीत के दरवाजे खुले रहेंगे, लेकिन सीमा की चौकसी में कोई दरार नहीं आने दी जाएगी।
बहरहाल, यही संतुलन आने वाले समय में भारत-चीन रिश्तों की सबसे बड़ी कसौटी होगा। अगर सैन्य तनाव में कमी वास्तविक और स्थायी साबित होती है, तो दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिए रास्ते खुल सकते हैं। लेकिन भारत के लिए अंतिम पैमाना बयान नहीं, बल्कि LAC पर चीन का व्यवहार होगा।

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