इलाज के लिए लोगों ने जेब से भरे ₹28 हजार-करोड़:यूपी में इंफेक्शन के मरीज सबसे ज्यादा; 5 साल के बच्चे भी तनाव के शिकार

इलाज के लिए लोगों ने जेब से भरे ₹28 हजार-करोड़:यूपी में इंफेक्शन के मरीज सबसे ज्यादा; 5 साल के बच्चे भी तनाव के शिकार

पहले दो घटनाएं पढ़िए… 1. रामपुर (जनवरी, 2026): स्वार इलाके में रहने वाले जुल्फेकार अली (55) ने अपने 3 बीमार बेटों का इलाज कराने के लिए घर बेच दिया था। फिर कर्ज और बच्चों की बीमारी से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। 2. बिजनौर (मार्च, 2026): चांदपुर में रहने वाले जाबिर अहमद (45) ने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। क्योंकि, पत्नी के कैंसर के इलाज के लिए उन पर करीब 25 लाख रुपए का कर्ज हो गया था। इन दो मामलों से साफ है कि यूपी में मेडिकल सर्विस आज भी आम आदमी की जेब से कोसों दूर है। यह बात नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) के हालिया सर्वे से भी साबित होती है। जनवरी से दिसंबर, 2025 तक हुए सर्वे के मुताबिक, यूपी में इलाज के लिए लोगों को करीब 28 हजार करोड़ रुपए अपनी जेब से खर्च करने पड़े। शहर के बजाय गांव के सरकारी अस्पताल में इलाज महंगा
NSO के ‘हाउसहोल्ड सोशल कंजम्प्शन: हेल्थ’ नाम के सर्वे से पता चला कि यूपी के सरकारी अस्पताल में भर्ती होने पर भी मरीज को औसतन 14 हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। अहम बात यह है कि शहर की तुलना में गांव के सरकारी अस्पताल में भर्ती होने पर ज्यादा खर्च होता है। शहर के सरकारी अस्पताल में भर्ती होने पर औसतन 10 हजार 547 रुपए, वहीं गांव के सरकारी अस्पताल में औसतन 16 हजार 650 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराने पर खर्च और ज्यादा बढ़ जाता है। शहर के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होने पर करीब 75 हजार रुपए, जबकि ग्रामीण इलाके के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होने पर 38 हजार रुपए औसतन खर्च करने पड़ते हैं। प्राइवेट अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी 6 गुना महंगी
सर्वे के मुताबिक, अगर आपको सर्दी, जुकाम, बुखार जैसी सीजनल बीमारी होती हैं, तो प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना सरकारी अस्पतालों से 6-7 गुना महंगा है। ऐसी बीमारियों का गांव के सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पर करीब 466 रुपए खर्च करने होते हैं। उसी बीमारी के लिए प्राइवेट अस्पताल में 2457 रुपए देने होते हैं। इसके अलावा सामान्य प्रसव पर औसत खर्च 13,434 रुपए आता है। प्राइवेट में यह खर्च 31,137 रुपए होता है। सरकारी अस्पताल में सिर्फ 2607 रुपए का खर्च आता है। सरकारी की बजाय प्राइवेट डॉक्टर पर भरोसा सर्वे से यह भी पता चला कि यूपी में लोग सरकारी अस्पतालों की जगह प्राइवेट अस्पतालों या क्लिनिक में इलाज कराना पसंद करते हैं। ग्रामीण इलाकों में 74%, जबकि शहर में 79% लोग प्राइवेट डॉक्टर के पास जाते हैं। मरीज को भर्ती करना पड़े, तब भी 71% मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख करते हैं। यह तस्वीर गांव और शहर में एक जैसी दिखती है। इसके अलावा अभी भी बहुत से लोग झोलाछाप डॉक्टरों (बिना डिग्री वाले) से इलाज करवा रहे हैं। गांव में 4% और शहर में 3% लोग झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराते हैं। सर्वे के मुताबिक, राज्य के 61.16 लाख लोगों को पिछले साल बीमारी या चोट की वजह से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इनमें सबसे ज्यादा मरीज इंफेक्शन के थे। यूपी में हर 100 में 8 बीमार, ये राष्ट्रीय औसत से कम NSO ने जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच यूपी के 1192 ग्रामीण और 700 शहरी ब्लॉक में सर्वे किया। इसमें 15 हजार 96 परिवारों के 80 हजार 477 लोगों के सेहत से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। सर्वे में 2 तरह के टाइम पीरियड में लोगों के बीमार पड़ने का पैटर्न देखा गया। सर्वे से पता चला कि यूपी के 100 में से 8 लोग हर 15 दिन में बीमार पड़ते हैं। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 13 से कम है। सबसे ज्यादा केरल में 100 में से 25 लोग से हर 15 दिन में बीमार पड़ते हैं। बच्चे इंफेक्शन, यूथ डाइजेशन और बुजुर्ग हार्ट प्रॉब्लम से परेशान NSO सर्वे के मुताबिक, पिछले साल अस्पताल में भर्ती होने वालों में 26% मरीजों की उम्र 30 साल से कम थी। वहीं, 14 साल तक के 45% बच्चों को इंफेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। 15 से 44 साल के मरीजों में डाइजेशन से जुड़ी परेशानी ज्यादा देखने को मिली। भर्ती होने वालों में करीब 15% मरीज इसी के थे। 45 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों हार्ट की बीमारियां ज्यादा पाई गईं। यूपी सरकार ने 2025-26 में फ्री दवा, फ्री जांच, एंबुलेंस, टीकाकरण जैसी सुविधाओं (जिसका सीधा फायदा आम आदमी को मिलता है) पर करीब 17 हजार करोड़ रुपए खर्च किए। हालांकि, सरकार का हेल्थ बजट 50 हजार करोड़ का था। इसमें वेतन, पेंशन, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे खर्च भी शामिल हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… साइको किलर 7 और लोगों को मारने वाला था, 3 के सिर में गोली मारी; बैंक में झगड़े के बाद गंवाई थी नौकरी सेना से रिटायर साइको किलर गुरप्रीत सिंह एक-दो नहीं…7 लोगों को मारने वाला था। लेकिन, उससे पहले ही पकड़ा गया। क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान भी वह पुलिस अफसर की पिस्टल छीनकर भागा। फिर एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया। पूरी खबर पढ़ें…

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *