इंदौर-देवास बायपास… कहने को रोड की मरम्मत, पैचवर्क व जियो ग्रिड के नाम पर 70 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यहां 80 फीट लंबी दरारें, जगह-जगह गड्ढे और नालियां खुली पड़ी हैं। हर दिन वाहन चालक इनके कारण दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। वहीं बा-बार जाम की स्थिति भी बन रही है। सवाल यह है कि 70 करोड़ रुपए खर्च कहां किए गए। गड्ढों व दचकों से बचाने के लिए 3 साल पहले पुणे की कंपनी को मांगलिया से राऊ तक 11 फ्लायओवर पर जियो ग्रिड बिछाने और मुख्य मार्ग पर पैचवर्क का काम दिया गया था, लेकिन न तो एक भी फ्लायओवर पर जियो ग्रिड बिछ पाई और न ही कहीं पैचवर्क नजर आता है। ऐसे गड्ढे कि ट्रक भी डगमगा रहे
2012 से 2014 के बीच बने बायपास पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। कई जगह तो एक फीट तक गहरे गड्ढे हैं, जिसके कारण दो पहिया वाहन से लेकर 16 पहिया ट्रक भी डगमगा रहे हैं। बायपास से प्रतिदिन 2 लाख से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। गड्ढों के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। समस्याएं और भी हैं पर आंखें मूंदे बैठे हैं अधिकारी अगर मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा तो हम भुगतान रोकेंगे
जिस हिस्से का मेंटेनेंस पीरियड समाप्त नहीं हुआ है, उस पर नया काम नहीं शुरू करेंगे। अगर मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा है तो हम मेंटेनेंस अवधि को कम करके उसका भुगतान रोकेंगे। हमें तत्काल काम करवाना था, इसीलिए नया टेंडर जारी किया है। – श्रवण कुमार सिंह, रीजनल ऑफिसर, एनएचएआई काम के दौरान ही गिर पड़ा था फ्लाईओवर का प्लास्टर
पुणे की कंपनी के काम के दौरान ही सितंबर 2025 में कनाड़िया फ्लायओवर की सतह पर गड्ढे हो गए थे। फ्लायओवर से बड़े-बड़े टुकड़े भरभराकर नीचे गिरे। ब्रिज के जिस हिस्से का प्लास्टर गिरा था, उसे खोदकर फिर से बनाया गया। नए सिरे से स्लैब कास्ट हुई ।


