कटौना स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को नहीं मिल रही सेवा:थर्मामीटर नहीं, स्टाफ गायब; 8 हजार आबादी का जर्जर भवन में इलाज, शौचालय में दरवाजा नहीं

कटौना स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को नहीं मिल रही सेवा:थर्मामीटर नहीं, स्टाफ गायब; 8 हजार आबादी का जर्जर भवन में इलाज, शौचालय में दरवाजा नहीं

जमुई के बरहट प्रखंड स्थित कटौना पंचायत का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार है। करीब 8 हजार की आबादी की स्वास्थ्य जिम्मेदारी संभालने वाला यह केंद्र खुद ही अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है, जिससे मरीजों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। केंद्र में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यहां पानी, बिजली, पंखा, टेबल और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। कागजों में सुसज्जित दिखने वाला यह केंद्र हकीकत में सुविधाओं से वंचित है। 7 लाख की लागत से लगा दरवाजा टूटा अस्पताल के कई कमरे जर्जर हालत में हैं और उनके दरवाजे टूटे हुए हैं। पांच महीने पहले करीब सात लाख रुपए की लागत से लगाए गए दरवाजों का टूट जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्वास्थ्यकर्मियों में से अधिकांश अनुपस्थित पाए गए। ड्यूटी पर केवल डॉक्टर समीर राज, एएनएम नीलम कुमारी और डाटा ऑपरेटर मौजूद थे। जानकारी के अनुसार, जीएनएम संध्या कुमारी पिछले तीन वर्षों से यहां नहीं आ रही हैं और उनका डेपुटेशन अन्य केंद्र में करा लिया गया है। अस्पताल में थर्मामीटर तक उपलब्ध नहीं अस्पताल में बुखार मापने के लिए थर्मामीटर तक उपलब्ध नहीं है। ब्लड प्रेशर और शुगर जांच के उपकरण भी खराब पड़े हैं। नतीजतन, रोजाना आने वाले मरीजों को बिना किसी जांच के ही दवाइयां देकर वापस भेज दिया जाता है। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने भी संसाधनों की कमी को एक बड़ी समस्या बताया। उनके अनुसार, ओपीडी में न बेड हैं, न ब्लड प्रेशर मापने की मशीन और न ही पर्याप्त बैठने की व्यवस्था। गर्मी में पंखे के अभाव और बिजली कटौती के कारण पूरी व्यवस्था ठप हो जाती है। 3 साल से बिना दरवाजे का है शौचालय अस्पताल का शौचालय पिछले तीन वर्षों से बिना दरवाजे के है। पानी की आपूर्ति भी अनियमित है, जिससे मरीजों और कर्मचारियों दोनों को परेशानी होती है। सफाई कर्मी की अनुपस्थिति के कारण परिसर में गंदगी फैली रहती है।
इस मामले में जिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने जानकारी नहीं होने की बात कही है। उन्होंने मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ग्राम पंचायत के मुखिया कपिल देव प्रसाद ने चिकित्सा पदाधिकारी से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच की जाय और स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने की कोशिश की जाय। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के इस बदहाल स्थित ससरकारी व्यवस्था की उस हकीकत को उजागर करता है, जहां योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं और ग्रामीणों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं नहीं मिलती। जमुई के बरहट प्रखंड स्थित कटौना पंचायत का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार है। करीब 8 हजार की आबादी की स्वास्थ्य जिम्मेदारी संभालने वाला यह केंद्र खुद ही अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है, जिससे मरीजों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। केंद्र में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यहां पानी, बिजली, पंखा, टेबल और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। कागजों में सुसज्जित दिखने वाला यह केंद्र हकीकत में सुविधाओं से वंचित है। 7 लाख की लागत से लगा दरवाजा टूटा अस्पताल के कई कमरे जर्जर हालत में हैं और उनके दरवाजे टूटे हुए हैं। पांच महीने पहले करीब सात लाख रुपए की लागत से लगाए गए दरवाजों का टूट जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्वास्थ्यकर्मियों में से अधिकांश अनुपस्थित पाए गए। ड्यूटी पर केवल डॉक्टर समीर राज, एएनएम नीलम कुमारी और डाटा ऑपरेटर मौजूद थे। जानकारी के अनुसार, जीएनएम संध्या कुमारी पिछले तीन वर्षों से यहां नहीं आ रही हैं और उनका डेपुटेशन अन्य केंद्र में करा लिया गया है। अस्पताल में थर्मामीटर तक उपलब्ध नहीं अस्पताल में बुखार मापने के लिए थर्मामीटर तक उपलब्ध नहीं है। ब्लड प्रेशर और शुगर जांच के उपकरण भी खराब पड़े हैं। नतीजतन, रोजाना आने वाले मरीजों को बिना किसी जांच के ही दवाइयां देकर वापस भेज दिया जाता है। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने भी संसाधनों की कमी को एक बड़ी समस्या बताया। उनके अनुसार, ओपीडी में न बेड हैं, न ब्लड प्रेशर मापने की मशीन और न ही पर्याप्त बैठने की व्यवस्था। गर्मी में पंखे के अभाव और बिजली कटौती के कारण पूरी व्यवस्था ठप हो जाती है। 3 साल से बिना दरवाजे का है शौचालय अस्पताल का शौचालय पिछले तीन वर्षों से बिना दरवाजे के है। पानी की आपूर्ति भी अनियमित है, जिससे मरीजों और कर्मचारियों दोनों को परेशानी होती है। सफाई कर्मी की अनुपस्थिति के कारण परिसर में गंदगी फैली रहती है।
इस मामले में जिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने जानकारी नहीं होने की बात कही है। उन्होंने मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ग्राम पंचायत के मुखिया कपिल देव प्रसाद ने चिकित्सा पदाधिकारी से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच की जाय और स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने की कोशिश की जाय। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के इस बदहाल स्थित ससरकारी व्यवस्था की उस हकीकत को उजागर करता है, जहां योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं और ग्रामीणों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं नहीं मिलती।  

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