Javed Sheikh Pakistani Dhurandhar Controversy: पाकिस्तानी टीवी इंडस्ट्री का एक नया शो इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा में है। सीरीज ‘जहन्नुम बरास्ता जन्नत’ के कुछ क्लिप वायरल होने के बाद दर्शकों ने इसकी तुलना हाल ही में चर्चित फिल्म ‘धुरंधर द रिवेंज’ से करनी शुरू कर दी है। खास बात ये है कि इस शो में बॉलीवुड में लंबे समय तक काम कर चुके अभिनेता जावेद शेख भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिनकी एक्टिंग और संवाद शैली को लेकर इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
वायरल क्लिप्स ने बढ़ाया विवाद (Javed Sheikh Pakistani Dhurandhar Controversy)
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो क्लिप्स में जावेद शेख एक ऐसे किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसे भारत की खुफिया रणनीति से प्रेरित बताया जा रहा है। उनके किरदार के संवादों में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ और कथित मिशनों का जिक्र होने के कारण दर्शकों के बीच बहस और तेज हो गई है। कई यूजर्स ने इस शो को ‘पाकिस्तानी धुरंधर’ तक कहना शुरू कर दिया है।
इंटरनेट पर वायरल हो रहे इन सीनों में हिंदी भाषा के इस्तेमाल और उच्चारण को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है। कई दर्शकों का कहना है कि डायलॉग्स और अभिनय का स्तर अपेक्षाओं से काफी कमजोर नजर आता है।
जावेद शेख की भूमिका पर उठे सवाल (Javed Sheikh Pakistani Dhurandhar Controversy)
गौरतलब है कि जावेद शेख ने अपने करियर में कई हिंदी फिल्मों में भी काम किया है। वो ओम शांति ओम में शाहरुख खान के पिता का किरदार निभा चुके हैं। वहीं नमस्ते लंदन, तमाशा और हेपी भाग जाएगी जैसी फिल्मों का हिस्सा रह चुके हैं। ऐसे में इस नए शो में उनके किरदार को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं और ज्यादा तेज हो गई हैं।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोप लगाया कि शो में दिखाए गए सीन भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देते नजर आते हैं। वहीं कुछ लोगों ने इसे कम बजट का प्रोडक्शन बताते हुए इसकी तकनीकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए।
हिंदी डायलॉग्स बने चर्चा का विषय
वायरल क्लिप्स में इस्तेमाल की गई हिंदी भाषा और डायलॉग्स बोलने की शैली को लेकर भी इंटरनेट पर मजाक बनाया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे अजीब एक्सेंट वाली हिंदी बताया, जबकि कुछ ने इसकी तुलना वेब सीरीज के लो-बजट कंटेंट से कर दी।
हालांकि कुछ दर्शकों का मानना है कि इस तरह के शो को पूरी तरह से राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय मनोरंजन के रूप में भी समझा जाना चाहिए। फिर भी सोशल मीडिया पर चल रही बहस यह संकेत दे रही है कि दर्शक अब कंटेंट की गुणवत्ता और संवेदनशील विषयों की प्रस्तुति को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो चुके हैं।


