पंजाब में हुए बम धमाकों को लेकर राजनीति शुरू हो गई। आम आदमी पार्टी और सीएम भगवंत मान इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार बता रहे हैं। तो दूसरी तरफ, जब चंडीगढ़ में इस संबंध में एक प्रोग्राम में गवर्नर से बातचीत की गई, तो उनका जवाब था, “क्योंकि मैं बीजेपी तो हूं नहीं। पर मैं सोचता हूं, इस तरह की बातें कहने से कोई लाभ नहीं है। हम सब लोगों को अब स्वीकार करना पड़ेगा और इसके लिए आगे भविष्य में ना हो, उसके लिए हमारी तैयारी चाहिए। हम सब की जिम्मेदारी है कि अगर इस प्रकार की घटनाएं घट रही हैं, तो यह ना घटें। केवल देखने से काम नहीं चलेगा। हमको भी उसमें कुछ ना कुछ हिस्सेदार बनने की कोशिश करनी पड़ेगी।” तीन प्वाइंटों में जाने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने क्या कहा – 1. राज्यपाल ने कहा कि, “मैं सोचता हूं, क्योंकि मैं बीजेपी तो हूं नहीं। पर मैं सोचता हूं, इस तरह की बातें कहने से कोई लाभ नहीं है। सामान्यतः कल हमारे ऑपरेशन सिंदूर का एक वर्ष पूरा हुआ है। तो जो इस प्रकार की शक्तियां हैं, वो बराबर इस बात की कोशिश कर रही हैं कि यहां अशांति कैसे फैले, आपस में विद्वेषता कैसे फैले और उसके कारण से प्रयोग किया है। तो मैं सोचता हूं, पुलिस भी इसकी कार्रवाई कर रही है। हम लोग भी सचेत हैं। लेकिन घटना हुई है। इसका हम सब लोगों को अब स्वीकार करना पड़ेगा और इसके लिए आगे भविष्य में ना हो, उसके लिए हमारी तैयारी चाहिए।” 2. इसके बाद मीडिया ने गवर्नर से सवाल किया कि, “सर, लेकिन जो अपोजिशन है, वो भी लगातार बोल रही है कि हमलों में बीजेपी का हाथ है। इसका सबूत पंजाब के सीएम दें या इस्तीफा दें? क्योंकि यह डायरेक्टली…”। इस पर गवर्नर ने कहा कि, “यह कुछ बातें उन लोगों से पूछो। मैं इसके बीच में हूं। मैं अभी इस बारे में किसी के ऊपर दोषारोपण नहीं करता हूं। पर मैं सोचता हूं कि हम सब की जिम्मेदारी है कि अगर इस प्रकार की घटनाएं घट रही हैं, तो यह ना घटें। केवल देखने से काम नहीं चलेगा। हमको भी उसमें कुछ ना कुछ हिस्सेदार बनने की कोशिश करनी पड़ेगी।” 3. चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के स्वास्थ्य विषय पर आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में गुलाब चंद कटारिया ने कहा, “हमारी जारी की गई पॉलिसी से काफी प्रगति हुई है, लेकिन अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। आज की चर्चा स्वास्थ्य, ब्यूटी और वेलनेस सेक्टर पर केंद्रित रही और इस बात पर भी कि इंडस्ट्री समाज के लिए किस तरह अधिक योगदान दे सकती है। पंजाब की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक नशे की समस्या है, जिसे समाप्त करना जरूरी है। इसके साथ ही टीबी जैसी बीमारी पर भी सामूहिक प्रयासों से काबू पाया जा सकता है। इंडस्ट्री को आज के युवाओं की जरूरतों के अनुसार उन्हें तैयार करना चाहिए। इसके लिए या तो विश्वविद्यालयों के साथ समन्वय किया जाए या फिर उद्योग अपने स्तर पर 2 से 8 महीने के शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स शुरू करें, ताकि युवाओं को कौशल और रोजगार मिल सके। राज्यपाल ने कहा कि उद्योग केवल मुनाफा कमाने के लिए नहीं चलाए जाने चाहिए। ऐसी चीजें बनाकर पैसा कमाया जा सकता है, जो समाज और संस्कृति को कमजोर करें, लेकिन उससे देश की सेवा नहीं हो सकती। असली सफलता ऐसे उद्योग खड़े करने में है, जो समाज को मजबूत करें और देश के भविष्य को बेहतर बनाएं।”


