बिहार पुलिस में वर्दी पर चंदन तिलक लगाने को लेकर प्रतिबंध का विवाद बढ़ता जा रहा है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार के एक बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रंग ले चुका है। बयान में पुलिसकर्मियों को वर्दी में चंदन तिलक न लगाने और यदि लगाया है तो उसे तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, इस निर्देश को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत दिशा-निर्देश सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसके बावजूद, विभिन्न संगठनों में इसे लेकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऐसे फैसलों से लोगों की आस्था को पहुंचती ठेस विश्वामित्र सेना ने प्रतिबंध के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि यह कदम धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत है और इससे लोगों की आस्था को ठेस पहुंचती है। विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने बयान जारी कर कहा कि चंदन तिलक सनातन परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। चौबे ने आगे कहा कि वर्दी के नाम पर इस पर रोक लगाना अनुचित और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। धार्मिक भावनाओं के साथ अन्याय न होने देने की मांग ऐसे निर्देश संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं और अनावश्यक विवाद पैदा करते हैं। उन्होंने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल स्पष्टता देने और धार्मिक भावनाओं के साथ अन्याय न होने देने की मांग की। वहीं, जानकारों का मानना है कि पुलिस बल में वर्दी से जुड़े नियम अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने के लिए बनाए जाते हैं। इन नियमों के तहत कई बार धार्मिक या व्यक्तिगत प्रतीकों के प्रदर्शन पर सीमाएं तय की जाती हैं, ताकि ड्यूटी के दौरान निष्पक्षता और तटस्थता बनी रहे। इस मामले में आधिकारिक दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। बिहार पुलिस में वर्दी पर चंदन तिलक लगाने को लेकर प्रतिबंध का विवाद बढ़ता जा रहा है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार के एक बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रंग ले चुका है। बयान में पुलिसकर्मियों को वर्दी में चंदन तिलक न लगाने और यदि लगाया है तो उसे तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, इस निर्देश को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत दिशा-निर्देश सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसके बावजूद, विभिन्न संगठनों में इसे लेकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऐसे फैसलों से लोगों की आस्था को पहुंचती ठेस विश्वामित्र सेना ने प्रतिबंध के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि यह कदम धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत है और इससे लोगों की आस्था को ठेस पहुंचती है। विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने बयान जारी कर कहा कि चंदन तिलक सनातन परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। चौबे ने आगे कहा कि वर्दी के नाम पर इस पर रोक लगाना अनुचित और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। धार्मिक भावनाओं के साथ अन्याय न होने देने की मांग ऐसे निर्देश संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं और अनावश्यक विवाद पैदा करते हैं। उन्होंने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल स्पष्टता देने और धार्मिक भावनाओं के साथ अन्याय न होने देने की मांग की। वहीं, जानकारों का मानना है कि पुलिस बल में वर्दी से जुड़े नियम अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने के लिए बनाए जाते हैं। इन नियमों के तहत कई बार धार्मिक या व्यक्तिगत प्रतीकों के प्रदर्शन पर सीमाएं तय की जाती हैं, ताकि ड्यूटी के दौरान निष्पक्षता और तटस्थता बनी रहे। इस मामले में आधिकारिक दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।


