अमेरिका-ईरान तनाव में अब नया मोड़ आ गया है। सोमालिया तट से लेकर हॉर्मुज स्ट्रेट तक, दक्षिण कोरिया अब समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर सक्रिय हो गया है।
ईरान के साथ जारी तनाव के बीच साउथ कोरिया ने अपना 4400 टन वाला डिस्ट्रॉयर (खतरनाक युद्धपोत) हॉर्मुज की ओर रवाना कर दिया है।
फरवरी से बंद है हॉर्मुज
बता दें कि फरवरी के अंत में अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे खोलने के लिए सहयोगी देशों से बार-बार मदद मांगी है। दक्षिण कोरिया और जापान पर भी दबाव है। ऐसे में सियोल का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।
बुसान से रवाना हुआ रॉक्स वांग गन
15 मई को दक्षिण कोरिया के बुसान से ‘रॉक्स वांग गन’ नाम का डिस्ट्रॉयर रवाना हुआ। यह जहाज चोंघे यूनिट (Cheonghae Unit) में शामिल होगा।
यह यूनिट मुख्य रूप से सोमालिया के पास गल्फ ऑफ एडेन में समुद्री लुटेरों से निपटने और व्यापारी जहाजों की सुरक्षा का काम करती है।
जहाज पर करीब 260 जवान हैं। इनमें क्रू मेंबर्स, नेवल स्पेशल वारफेयर की बोर्डिंग टीम और लिंक्स हेलिकॉप्टर चलाने वाली एविएशन यूनिट शामिल है। ये जवान छह महीने के लिए ड्यूटी पर रहेंगे।
चोंघे यूनिट का अब तक का सफर
यह चोंघे यूनिट की 48वीं तैनाती है। वांग गन डिस्ट्रॉयर का यह नौवां विदेशी मिशन है। फिलहाल इस यूनिट का दायरा सोमालिया के पानी तक सीमित है, लेकिन सरकार और नेशनल असेंबली की मंजूरी मिलने पर इसे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज तक बढ़ाया जा सकता है।
दक्षिण कोरियाई नौसेना ने बताया कि यूनिट ने हवाई सुरक्षा अभ्यास और ड्रोन हमलों से बचाव की व्यवस्था को और मजबूत किया है। अगर जरूरत पड़ी तो यह कॉम्बाइंड मैरिटाइम फोर्सेज और ईयू नेवल फोर्स के साथ मिलकर काम करेगी।
अमेरिका के साथ मिलकर काम करने की तैयारी
पेंटागन में हाल ही हुई मंत्री स्तर की बैठक में दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आह्न ग्यू-बैक ने अमेरिकी रक्षा प्रमुख पेटे हेगसेथ को बताया कि वे वाशिंगटन के प्रयास में चरणबद्ध तरीके से योगदान देंगे। इसमें समर्थन घोषित करना, कर्मी भेजना, सूचना साझा करना और सैन्य संसाधन उपलब्ध कराना शामिल हो सकता है।
दक्षिण कोरिया के जहाजों की सुरक्षा और वैश्विक समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह तैनाती की गई है। अगर हॉर्मुज में स्थिति बिगड़ी तो चोंघे यूनिट वहां भी मदद पहुंचा सकती है। फ्रांस-ब्रिटेन के नेतृत्व वाले मिशन या अमेरिका के मैरिटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट में शामिल होने की संभावना पर भी चर्चा चल रही है।


