अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ समझौता करने को तैयार हो गए हैं, लेकिन उन्होंने एक फाइनल शर्त रख दी है। ट्रंप ने साफ कहा है कि उन्हें ईरान से बस एक बात की ही गारंटी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को 20 साल के लिए पूरी तरह रोकने का ठोस भरोसा दे, तो दोनों देशों के बीच एक नया समझौता हो सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
ईरान पर सख्ती, लेकिन डील का रास्ता भी खुला
ट्रंप ने हमेशा से ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वे अमेरिकी लोगों की आर्थिक परेशानियों को भी ज्यादा तवज्जो नहीं देते। उनका फोकस सिर्फ एक बात पर है – ईरान के पास परमाणु बम नहीं होना चाहिए।
अब ट्रंप ने 20 साल की लंबी अवधि का जिक्र किया है। यह प्रस्ताव पहले की बातचीत में भी आ चुका था, जहां अमेरिका 20 साल का ब्रेक चाहता था, लेकिन ईरान इसे 3-5 साल तक सीमित रखना चाहता था। ट्रंप का ताजा बयान दिखाता है कि अगर ईरान वाकई में मजबूत गारंटी दे, तो वाशिंगटन तैयार है आगे बढ़ने के लिए।
क्यों जरूरी है यह डील?
ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन अमेरिका और इजराइल को इस पर पूरा भरोसा नहीं है। पिछले साल हुए हमलों के बाद ईरान की क्षमता प्रभावित हुई, फिर भी दोनों तरफ से चिंता बनी हुई है।
ट्रंप प्रशासन मानता है कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है तो पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो जाएगा। इसलिए वे न सिर्फ कार्यक्रम रोकने, बल्कि पुराने स्टॉक को भी सौंपने या नष्ट करने पर जोर दे रहे हैं। ईरान की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पाकिस्तान जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।
पिछले समझौते की याद
2015 में ओबामा सरकार के समय ईरान के साथ JCPOA नाम का एक समझौता हुआ था, जिसमें ईरान ने कुछ सालों के लिए अपनी गतिविधियां सीमित कर ली थीं।
ट्रंप ने 2018 में उस डील से अमेरिका को बाहर निकाल लिया और कहा था कि यह बहुत कमजोर है। अब वे नया और मजबूत समझौता चाहते हैं जो अमेरिका के हितों की पूरी रक्षा करे।
अब क्या होने वाला है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दोनों पक्ष बीच का रास्ता निकाल लेते हैं तो युद्ध की आशंका कम हो सकती है और तेल की कीमतें भी स्थिर रहेंगी। लेकिन ईरान अगर सख्त रुख अपनाता है तो बातचीत लंबी खिंच सकती है। ट्रंप ने पहले भी कहा था कि अगर डील इस्लामाबाद में होती है तो वे खुद वहां जा सकते हैं।


