Nepal Flood: ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार 65% बढ़ी, नेपाल-भारत में अभी और बाढ़ आने की चेतावनी, क्या कह रही ताजा रिपोर्ट?

Nepal Flood: ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार 65% बढ़ी, नेपाल-भारत में अभी और बाढ़ आने की चेतावनी, क्या कह रही ताजा रिपोर्ट?

नेपाल और चीन के तिब्बत सीमा पर बुधवार को आई भयानक बाढ़ ने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस त्रासदी से अब तक 165 लोगों की मौत हो चुकी है।

वहीं, करीब 1500 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 800 विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। बाढ़ के चलते नेपाल-तिब्बत में कई गांव और घाटियां जलमग्न हो गईं।

कैसे अचानक आई बाढ़?

रॉयटर्स ने वैज्ञानिकों के हवाले से बताया कि यह आपदा नेपाल के लंगतांग लिरुंग चोटी के उत्तरी ढलान से शुरू हुई। वहां बर्फ और चट्टान का बड़ा हिस्सा टूटकर तिब्बत की तरफ ल्हेंदे खोला नदी में गिर गया। इससे मलबे का विशाल ढेर नदी में समाया और बाढ़ की लहरें बन गईं।

यह लहरें सीमा पार कई इलाकों में पहुंचीं। इसके चलते छह बड़े जलविद्युत प्लांट और ग्यिरोंग पोर्ट का व्यापारिक ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद बाढ़ ने 100 किलोमीटर दूर भारत की सीमा के पास भी नदी का रास्ता बदल दिया।

जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाया खतरा

इस भयानक आपदा के बाद विशेषज्ञ साफ कह रहे हैं कि बाढ़ की वजह जलवायु परिवर्तन है। जलवायु परिवर्तन ऊंचे पहाड़ों की चट्टानों और बर्फ को कमजोर कर रहा है।

न्यूजीलैंड के अर्थ साइंसेज के वैज्ञानिक साइमन कॉक्स ने रॉयटर्स को बताया कि बढ़ते तापमान से बर्फ का सहारा कम हो रहा है। पिघलते पानी और बारिश-ठंड के बदलते पैटर्न पहाड़ों को अस्थिर बना रहे हैं।

इससे बाढ़ और लैंड स्लाइड जैसी बड़ी घटनाएं पहले से ज्यादा होने लगी हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन अकेला कारण नहीं है, लेकिन इसकी भूमिका जरूर है।

भूकंप और ग्लेशियर पिघलने आपदा हो रही विनाशकारी

वहीं, आईसीआईएमओडी के विशेषज्ञ फारूक आजम ने बताया कि ग्लेशियर में तेजी से बर्फ पिघलने और भूकंप की हलचल ने मिलकर यह आपजा पैदा किया होगा।

हांगकांग विश्वविद्यालय के बेंजामिन हॉर्टन ने इसे ‘संयुक्त घटना’ बताया है। उन्होंने भी साफ तौर पर कहा कि भूकंप और ग्लेशियर पिघलने जैसी जलवायु से जुड़ी समस्याएं एक साथ मिलकर आपदा को और विनाशकारी बना रही हैं।

ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार पहले से तेज

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, नेपाल के पहाड़ों ने पिछले 30 साल में अपनी बर्फ का करीब एक तिहाई हिस्सा खो दिया है। पिछले दशक में ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार पहले से 65 प्रतिशत ज्यादा रही। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि नेपाल और भारत में अभी और बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है।

नेपाल में हाल के सालों में कई ऐसी घटनाएं हुईं, लेकिन पैमाना छोटा रहा। 2025 में ग्यिरोंग में बाढ़ आई थी। 2024 में शेरपा गांव थामे में ग्लेशियल झील फूटी थी। 2023 में सिक्किम में भी ऐसी ही आपदा आई थी। हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में बाढ़, भूस्खलन और हिमस्खलन लगातार बढ़ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *