दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्न पत्र लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए कहा कि 13 आरोपियों द्वारा अवैध आर्थिक लाभ के लिए प्रश्नपत्र लीक करने और उसे प्रसारित करने के लिए गिरोह बनाने के प्रथम दृष्टया पर्याप्त व पुख्ता सबूत मौजूद हैं। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने बुधवार को 13 आरोपियों के खिलाफ जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट पर संज्ञान लिया। अदालत ने बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराए गए आदेश में कहा, “सीबीआई द्वारा व्यापक जांच के दौरान जुटाए गए पर्याप्त और पुख्ता सबूतों से प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि उपरोक्त सभी आरोपी किसी न किसी रूप में नीट (स्नातक) 2026 के प्रश्न पत्र लीक गिरोह का हिस्सा थे।
इनमें से प्रत्येक ने परीक्षा के तीनों विषयों भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के प्रश्नपत्र को प्रसारित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।”
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कथित मुख्य आरोपी पी. वी. कुलकर्णी को पूरी जानकारी थी कि निर्धारित स्थान पर विषय विशेषज्ञों की तलाशी लेने की कोई व्यवस्था नहीं थी इसलिए उसने इसका फायदा उठाया और रसायन विज्ञान के प्रश्नपत्र का अनुवाद करते समय गुप्त रूप से तैयार की गई पर्चियां या छोटे नोट अपने साथ ले गया। अदालत ने कहा, “रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट है कि इन तीनों विशेषज्ञों कुलकर्णी, भौतिकी के लिए मनीषा संजय हवलदार और जीव विज्ञान के लिए मनीषा गुरुनाथ मंधारे ने यह काम सौंपे जाने से पहले लिखित रूप में वचन दिया था कि वे नीट- स्नातक 2026 से संबंधित सामग्री का कोई भी हिस्सा किसी के साथ किसी भी तरीके से साझा नहीं करेंगे।”
अदालत ने कहा कि इस वचन का उल्लंघन प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि इन आरोपियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के साथ विश्वासघात किया। एनटीए ने इन्हें अपने-अपने विषयों के नीट प्रश्नपत्र के अनुवाद का काम सौंपा था।
अदालत ने कहा, “इसके अलावा, अपने उक्त कृत्य से उन्होंने प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम की धारा 13 के तहत लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार भी किया।”
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह भी स्पष्ट है कि इन तीनों विषय विशेषज्ञों ने अवैध आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने परीक्षा से संबंधित सामग्री यानी अपने-अपने विषय के लीक हुए प्रश्न सह-आरोपियों और कई अभ्यर्थियों को “कोचिंग देने के बहाने” बेच दिए। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों का संज्ञान लिया।


