आईजीआईएमएस के डॉक्टरों ने एक मरीज की सांस की नली में दो महीने से फंसी मटन की हड्डी को निकाल कर बड़ी राहत दी। पूरी प्रक्रिया मरीज को बेहोश किए बिना महज 10 मिनट में पूरी कर ली गई। लखीसराय निवासी मरीज होली के दिन भोजन कर रहा था। इसी दौरान मटन की एक छोटी हड्डी का टुकड़ा सांस की नली में चला गया। इसके बाद लगातार सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सीने में असहजता की शिकायत बनी रही। शुरुआत में उसने सामान्य खांसी या एलर्जी मानकर कई जगहों पर इलाज कराया गया, लेकिन आराम नहीं मिला। आखिरकार वह आईजीआईएमएस के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग पहुंचा। चिकित्सकों ने लक्षण सुनने के बाद तुरंत सांस की नली में किसी बाहरी वस्तु के फंसे होने की आशंका जताई। पहले सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें बाईं मुख्य सांस नली में कुछ फंसा दिखाई दिया। इसके बाद ब्रोंकोस्कॉपी जांच की गई। डॉक्टरों ने बताया कि लंबे समय तक फंसे रहने के कारण हड्डी के चारों ओर मांस की परत जम गई थी, जिससे उसे निकालना और चुनौतीपूर्ण हो गया था। आईजीआईएमएस के डॉक्टरों ने एक मरीज की सांस की नली में दो महीने से फंसी मटन की हड्डी को निकाल कर बड़ी राहत दी। पूरी प्रक्रिया मरीज को बेहोश किए बिना महज 10 मिनट में पूरी कर ली गई। लखीसराय निवासी मरीज होली के दिन भोजन कर रहा था। इसी दौरान मटन की एक छोटी हड्डी का टुकड़ा सांस की नली में चला गया। इसके बाद लगातार सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सीने में असहजता की शिकायत बनी रही। शुरुआत में उसने सामान्य खांसी या एलर्जी मानकर कई जगहों पर इलाज कराया गया, लेकिन आराम नहीं मिला। आखिरकार वह आईजीआईएमएस के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग पहुंचा। चिकित्सकों ने लक्षण सुनने के बाद तुरंत सांस की नली में किसी बाहरी वस्तु के फंसे होने की आशंका जताई। पहले सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें बाईं मुख्य सांस नली में कुछ फंसा दिखाई दिया। इसके बाद ब्रोंकोस्कॉपी जांच की गई। डॉक्टरों ने बताया कि लंबे समय तक फंसे रहने के कारण हड्डी के चारों ओर मांस की परत जम गई थी, जिससे उसे निकालना और चुनौतीपूर्ण हो गया था।


