Muthuramalingam Thevar की जयंती पर पसुम्पोन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 10000 पुलिसकर्मी तैनात

Muthuramalingam Thevar की जयंती पर पसुम्पोन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 10000 पुलिसकर्मी तैनात

तमिलनाडु में शुक्रवार को स्वतंत्रता सेनानी और आध्यात्मिक नेता यू. मुथुरामलिंग थेवर की 119वीं जयंती और 64वीं गुरु पूजा के अवसर पर सैकड़ों लोगों ने पसुम्पोन स्थित उनके स्मारक पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरु हुये समारोह में भीड़ और कानून-व्यवस्था पर नजर रखने के लिए 10,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। इसके अलावा, 400 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और 38 निगरानी टावर स्थापित किए गए हैं।

यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। उधर मदुरै के गोरीपालयम जंक्शन पर स्थित मुथुरामलिंग थेवर की भव्य प्रतिमा पर भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहां पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ यातायात नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए हैं।

विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद पसुम्पोन के कामुथी स्थित उनके स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। थेवर जयंती और गुरु पूजा हर साल 30 अक्टूबर को मनाई जाती है। इसी दिन मुथुरामलिंग थेवर की जयंती और पुण्यतिथि दोनों पड़ती हैं।

वह राजनीतिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ साथ स्वतंत्रता आंदोलन एवं मद्रास क्षेत्र में सामाजिक सुधारों के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। वह अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रवादी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और भारत छोड़ो आंदोलन में भी हिस्सा लिया।

इस दौरान अंग्रेजों ने उन्हें कई बार जेल में डाला था। थेवर की प्रमुख उपलब्धियों में भेदभावपूर्ण ब्रिटिश आपराधिक जनजाति अधिनियम के खिलाफ चलाया गया अभियान शामिल है। इस कानून के तहत कुछ समुदायों को जन्मजात अपराधी घोषित किया गया था।

उनके लगातार विरोध के बाद 1946 में इस अधिनियम को निरस्त कर दिया गया और 1948 तक इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उन्होंने कार्यकर्ता ए. वैद्यनाथ अय्यर के साथ मिलकर 1939 में मदुरै के ऐतिहासिक मीनाक्षी देवी मंदिर प्रवेश आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन ने वंचित समुदायों के लिए मंदिर में प्रवेश का रास्ता खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक सुधारों में उनके योगदान को याद करते हुए हर साल 30 अक्टूबर को उन्हें राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी जाती है। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन सहित कई अन्य नेताओं के मदुरै के गोरीपालयम जंक्शन स्थित थेवर की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने की उम्मीद है।

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